नयी दिल्ली, 03 सितंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने 200 करोड़ रुपये की जबरन वसूली के एक मामले में कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर की पत्नी लीना पॉलोज़ की याचिका पर बुधवार को नाराजगी जताई।
पॉलोज़ ने दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित अपनी जमानत याचिका पर शीघ्र सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने कहा कि सिर्फ शीर्ष अदालत तक पहुंच की क्षमता के कारण हर कोई इस अदालत का रुख़ नहीं कर सकता।
पीठ ने याचिकाकर्ता के प्रति नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “यह स्वीकार्य नहीं है। सिर्फ सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच के कारण हर कोई यहाँ आता है और फिर स्थगन की मांग करता है।”
शीर्ष अदालत ने दिल्ली उच्च न्यायालय में लंबित अपनी जमानत याचिका की शीघ्र सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत आने पर पॉलोज़ की आलोचना की।
पीठ ने कहा कि मामलों की शीघ्र सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत का रुख़ करने की यह प्रवृत्ति स्वीकार्य नहीं है।
इस पर पॉलोज़ के वकील ने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय में हर रोज़ सूचीबद्ध होने के बावजूद उनके मामले की सुनवाई नहीं हो रही है।
उन्होंने यह कहते हुए स्थगन की माँग की कि मामला आज भी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है। पीठ ने मामले को स्थगित करने पर सहमति जताई।
गौरतलब है कि चंद्रशेखर और पॉलोज़ प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दर्ज एक धन शोधन मामले में कार्यवाही का सामना कर रहे हैं। उन्हें शुरू में जबरन वसूली के मामले में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
यह आरोप लगाया गया था कि पॉलोज़, चंद्रशेखर और अन्य आरोपियों ने हवाला के ज़रिए पैसे जमा करने और फर्जी कंपनियाँ बनाकर अपराध से प्राप्त धन को ठिकाने लगाने की कोशिश की।
पुलिस ने उनके खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम के तहत भी कठोर धारायें लगायी हैं।
