
सीधी। शहर के राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 39 रीवा-सीधी मार्ग बाईपास जमोड़ी ओव्हरब्रिज पर मंगलवार की रात्रि करीब 11 बजे अज्ञात ट्रक की चपेट से हुए दर्दनाक सड़क हादसे में चार गौवंशों की मौके पर तड़प -तड़प कर जान चली गई। वहीं दो गौवंश गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलने पर गौसेवकों ने पहुंचकर मौके पर गंभीर रूप से घायल दोनो बछड़ों का प्राथमिक उपचार कराया। हादसे में दोनो बछड़ों के पैर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। एक बछड़े का तो पिछला पैर का अधिकांश हिस्सा कटकर अलग हो गया है। जबकि दूसरे बछड़े का पैर गंभीर रूप से चोटिल हो गया। मौके पर पहुंचे शिवसेना के प्रदेश उपाध्यक्ष विवेक पाण्डेय, गौसेवक केशव मिश्रा एवं अन्य गौसेवकों ने जमोड़ी पुलिस को सूचना दिया वहीं अन्य अधिकारियों को कॉल करने का प्रयास किया गया लेकिन उनके द्वारा रिसीव नहीं किया गया। तत्संबंध में जमोड़ी थाना प्रभारी द्वारा सुबह मृत गौवंशों को दफन कराने का आश्वासन दिया है। बाद में गौसेवक केशव मिश्रा ने दोनो घायल बछड़ों को प्राथमिक उपचार के पश्चात शहर के कांजी हाउस पहुंचाया। तत्संंबंध में आक्रोषित गौसेवकों का कहना था कि इस दुखद घटना के लिए सबसे बड़े अपराधी वह गौपालक हैं जिनके द्वारा अपने गौवंशों को मरने के लिए सडक़ों पर आवारा छोंंड़ दिया गया है। वहीं दूसरा अपराधी जिम्मेदार प्रशासन और जन प्रतिनिधि हैं जिनकी लापरवाही से बजट के बावजूद गौवंश सडक़ों पर मर रहे हैं। यह गौवंश यदि भूंख मिटाने के लिए खेत में जाते हैं तो किसान मारते हैं और सडक़ में आते हैं तो भारी वाहन उन्हें मौत के आगोश में सुला देते हैं या फिर अपंग बना देते हैं। सनातन संस्कृति में गौमाता का स्थान सर्वोच्च है लेकिन वर्तमान में उनका लालन-पोषण होने की बजाय उपेक्षा मिल रही है। ऐसे में दोषियों को चिन्हित कर प्रशासन को कठोर कार्यवाही करने के साथ ही लापरवाह गौपालकों को जेल भेजना आवश्यक है। साथ ही सरकार को गौवंश की सुरक्षा हेतु सख्त और प्रभावी कानून बनाना चाहिए। जिससे गौवंशों की सुरक्षा हो सके। वहीं गौशालाओं एवं बाड़ों की संख्या ग्राम पंचायत स्तर तक बनाते हुए गौवंशों को सुरक्षित ठिकाना उपलब्ध कराना चाहिए। जिससे वह भी सुरक्षित हो सकें।
पैर कटने पर भी संघर्ष कर रहा बछड़ा
जमोड़ी ओव्हरब्रिज पर देर रात ट्रक की चपेट में गंभीर रूप से घायल हुए एक बछड़े का पिछला एक पैर पूरी तरह से कट गया। प्राथमिक उपचार के पश्चात गौसेवकों की मौजूदगी में यह घायल बछड़ा खड़े होने के प्रयास में संघर्ष करता रहा। काफी मशक्कत के बाद यह खड़ा हुआ लेकिन उसे यह नहीं आभाष हो रहा था कि जिन पैरों से वह चलता था एक पिछला पैर अब कट चुका है। इस वजह से तीन पैर से ही यह बछड़ा चलने के प्रयास में काफी जद्दोजेहद करता रहा। रात में इस दृश्य को देखकर मौजूद गौसेवकों की रूह भी कांप गई। यह बेजुबान पैर कटने के बाद भी खड़े होने का प्रयास कर रहा था। गौसेवकों ने संघर्षरत गंभीर रूप से घायल बछड़े को संभाला और रात में दोनो घायल बछड़ों को शहर के कांजी हाउस में पहुंचाने की व्यवस्था की। जिससे कांजी हाउस में गंभीर रूप से घायल दोनो बछड़ों को उपचार के साथ ही खाने-पीने की सुविधा भी बिना भटकाव के मिल सके।
इनका कहना है
जिले में गौवंशों की हालत काफी दयनीय है। आवारा छोंड़े जाने के बाद इन गौवंशों का कोई ठिकाना नहीं है। भूंख मिटाने के लिए यदि खेत में जाते हैं तो किसानों द्वारा डंडों से काफी बेरहमी के साथ पीटा जाता है। यदि सडक़ पर आते हैं तो भारी वाहनों की चपेट में आकर या तो मौत के गाल में समा जाते हैं या फिर गंभीर रूप से घायल होकर हमेंशा के लिए लाचार हो जाते हैं। ऐसे में प्रशासन को आगे आकर गौवंशों की सुरक्षा के लिए ठोस उपाय करना चाहिए।
विवेक पाण्डेय, गौसेवक
