
नई दिल्ली, 02 सितंबर 2025: केंद्र सरकार ने 2025-26 सीजन के लिए एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया है। अब चीनी मिलों और डिस्टिलरी को गन्ने, चावल और मक्के से एथेनॉल बनाने की पूरी अनुमति दी गई है। यह कदम देश में वैकल्पिक और जैव-ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा देने, कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए उठाया गया है। इस नई नीति से गन्ना किसानों को सीधे तौर पर फायदा होगा, क्योंकि उनकी फसल का उपयोग अब सिर्फ चीनी बनाने तक सीमित नहीं रहेगा।
एथेनॉल उत्पादन का लक्ष्य और लाभ
सरकार ने 2025 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए घरेलू एथेनॉल उत्पादन को बढ़ाना बेहद जरूरी है। एथेनॉल का उत्पादन न केवल कच्चे तेल के आयात बिल को कम करेगा, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर है, क्योंकि यह एक स्वच्छ ईंधन है। इसके अलावा, गन्ने के अतिरिक्त स्टॉक को एथेनॉल में बदलने से चीनी मिलों को आर्थिक स्थिरता मिलेगी, जिससे वे गन्ना किसानों को समय पर भुगतान कर पाएंगे। यह किसानों और चीनी उद्योग दोनों के लिए एक लाभकारी स्थिति है।
किसानों और उद्योग के लिए सकारात्मक संकेत
सरकार के इस फैसले से चीनी मिलों और डिस्टिलरी में नया निवेश आने की संभावना है। कई कंपनियां पहले से ही अपनी क्षमता बढ़ाने की योजना बना रही हैं। यह कदम किसानों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिलेगा और गन्ना उगाने के लिए प्रोत्साहन भी मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति न केवल एथेनॉल उद्योग को मजबूत करेगी, बल्कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
