भारतीय उद्योग की ‘रीढ़’ पर संकट, छोटे और मध्यम उद्योग सरकार से मदद की आस में

नई दिल्ली, 30 अगस्त। भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद कहे जाने वाले छोटे और मध्यम उद्योग (SMEs) इन दिनों गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमतों, वैश्विक मांग में कमी और कठिन वित्तीय चुनौतियों के कारण इन उद्योगों को भारी नुकसान हो रहा है। इसके चलते देशभर के SME मालिक अपनी समस्याओं को लेकर सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं।

प्रमुख चुनौतियां और मांग

SME क्षेत्र लंबे समय से कई चुनौतियों से जूझ रहा है। इस समय सबसे बड़ी समस्या कच्चे माल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी है, जिसने उनके उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर आर्थिक मंदी के कारण निर्यात में भी भारी गिरावट आई है। इन उद्योगों के मालिकों का कहना है कि सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए ताकि उन्हें वित्तीय संकट से बाहर निकाला जा सके। उनकी प्रमुख मांगों में रियायती ऋण, करों में कटौती और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विशेष पैकेज शामिल हैं।

अर्थव्यवस्था पर संभावित असर

अगर SME क्षेत्र को समय पर मदद नहीं मिली तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। ये उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देते हैं और भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में एक बड़ा योगदान देते हैं। इस क्षेत्र के कमजोर पड़ने से बेरोजगारी बढ़ सकती है और आर्थिक विकास की गति धीमी हो सकती है। सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह इन उद्योगों की समस्याओं को गंभीरता से ले और भारतीय अर्थव्यवस्था की इस ‘रीढ़’ को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए।

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