भक्ति में डूबा गुजरात, “गणपति बप्पा मोरया“ की गूंज

अहमदाबाद, 27 अगस्त (वार्ता) गुजरात में बुधवार को “गणपति बप्पा मोरया“ और “गणपति आयो बाप्पा-गणपति आयो, रिद्धि-सिद्धि लायो बाप्पा रिद्धि-सिद्धि लायो, गजानन आयो-रिद्धि सिद्धि लायो की ध्वनि गुंजायमान रही।

राज्य में आज सुबह से ही गणेश चतुर्थी का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। यह भगवान गणेश का जन्मदिन है, जिन्हें विघ्न हरता, समृद्धि और सौभाग्य का देवता माना जाता है।

चारों ओर गणपति भक्ति में डूबा माहौल नजर आ रहा है।“ गणपति नो जय जय कार, माटी नी मूर्ति नो करीए आवकार” , गणपति का जय-जय कार, मिट्टी की मूर्ति का करें सत्कार और स्वच्छ देश-प्रसन्न की गूंज के साथ इको फ्रेडली गणेशोत्सव की धूम दस दिवसीय गणेशोत्सव के रोज देखने को मिलेगी।

प्रदेश के सूरत,अहमदाबाद, बडोदरा, राजकोट और जूनागढ सहित सभी शहरों में गणेश उत्सव धूमधामसे मनाया जा रहा है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर घर-घर, गांव-गांव, शहरों में गणेश जी की मूर्तियां स्थापित करके दस दिन तक रोज सुबह शाम महा आरती, भजन कीर्तन और डायरा गुजराती भजन आयोजित किये जाएंगे।

गणेश चतुर्थी पर भक्त अपने घरों के साथ-साथ गलियों में भी गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करते हैं और दस दिनों तक उनकी पूजा करते हैं। इस दिन गणेश मंदिरों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। जूनागढ़ शहर के आस्था के प्रतीक ईगल मंदिर की, जहाँ बाईं सूंड वाले गणेश विराजमान हैं।

वडोदरा शहर में स्थित धुंडिराज गणपति मंदिर महाराष्ट्रीयन, गुजराती और राजस्थानी वास्तुकला के मिश्रण से निर्मित एक मंदिर है। मंदिर के गर्भगृह में शुभ विघ्नहर्ता धुंडिराज गणपति विराजमान हैं। सबसे बड़ा गणपति मंदिर श्री सिद्धिविनायक देवदर्शन, महेमदाबाद में स्थित है। माना जाता है कि प्रत्येक मंगलवार और चतुर्थी को इस मंदिर में दर्शन करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, बड़ी संख्या में भक्त यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। राजकोट के ढाक मंदिर में भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सिद्धिविनायक गणपति मंदिर बेहद खूबसूरत है। सूरत में भी गणपति मंदिरों में भीड़ देखी गयी। भगवान गजानन का मंदिर ऊंझा तालुका के ऐठोर गाँव की सीमा से होकर गुजरने वाली पुष्पावती नदी के तट पर स्थित है। इस मंदिर की विशेषता यह है कि इस मंदिर में गणपति की मूर्ति किसी धातु या लकड़ी से नहीं बनी है, यह मूर्ति रेणु (मिट्टी) से बनी है। गणेश मंदिर, जिसे गणपतपुरा या गणेशपुरा के नाम से भी जाना जाता है, धोलका शहर के पास स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है।

राज्य के कुछ स्थानो मे गणेशोत्सव के दूसरे, तीसरे, पांचवे दिन और ज्यादातर स्थानो पर श्रद्धालु अनंत चतुर्दशी को गणेश मूर्तियो को घर-घर, नदी, सरोवर या समुद्र मे विर्सजित करेगे और इसके साथ ही दस दिवसीय गणोत्सव का समापन होगा।

 

 

 

 

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