कनाडा और अमेरिका के रिश्तों में तल्खी: ट्रम्प ने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ से मार्क कार्नी का निमंत्रण वापस लिया

वाशिंगटन, 23 जनवरी (वार्ता) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ (शांति बोर्ड) ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को दिया गया निमंत्रण वापस ले लिया है। श्री ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट से इस निर्णय की जानकारी दी। प्रधानमंत्री कार्नी को संबोधित एक संक्षिप्त पत्र के रूप में लिखे संदेश में श्री ट्रम्प ने बिना कोई विशेष कारण बताए स्पष्ट किया कि कनाडा के इस निकाय में शामिल होने के निमंत्रण को रद्द माना जाए। यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच गहराते कूटनीतिक मतभेदों की ओर इशारा कर रहा है। यह कदम दोनों नेताओं के बीच इस सप्ताह हुई सार्वजनिक बयानबाजी और तीखी नोकझोंक के बाद उठाया गया है। इससे पहले गुरुवार को श्री कार्नी ने ट्रंप के उस विवादास्पद दावे को सिरे से खारिज कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि कनाडा अपने अस्तित्व के लिए अमेरिका पर निर्भर है। स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच से लौटने के बाद श्री कार्नी ने क्यूबेक सिटी में कहा था कि कनाडा और अमेरिका के बीच आर्थिक और सुरक्षा के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय साझेदारी है, लेकिन कनाडा अमेरिका के कारण जीवित नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कनाडा अपनी विशिष्ट पहचान और नागरिकों के कारण फल-फूल रहा है।

दावोस शिखर सम्मेलन के दौरान श्री कार्नी ने वैश्विक व्यवस्था में आने वाली ‘दरार’ के प्रति आगाह किया था और प्रमुख शक्तियों द्वारा टैरिफ (शुल्क) तथा आर्थिक दबाव के उपयोग की खुलकर आलोचना की थी। उन्होंने ग्रीनलैंड और डेनमार्क के प्रति भी अपना समर्थन व्यक्त किया था, जिसे अमेरिकी नीतियों के विरोध के रूप में देखा गया। इसके विपरीत, श्री ट्रम्प ने उसी मंच से बोलते हुए दावा किया था कि “कनाडा अमेरिका की वजह से ही जीवित है।” दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति और कनाडाई प्रधानमंत्री के बीच कोई द्विपक्षीय मुलाकात भी नहीं हुई थी, जिससे तनाव की स्थिति पहले ही स्पष्ट हो गई थी। व्हाइट हाउस में दोबारा वापसी के बाद से श्री ट्रम्प ने कनाडा के साथ व्यापारिक और राजनीतिक मोर्चे पर कड़ा रुख अपना रखा है। उन्होंने कनाडा पर व्यापक व्यापारिक शुल्क लगा दिए हैं और बार-बार यह सुझाव देकर विवाद पैदा किया है कि कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बन जाना चाहिए। निमंत्रण वापस लेने के इस ताजा फैसले के बाद दोनों पड़ोसी देशों के बीच व्यापारिक और राजनीतिक संबंधों में और अधिक कड़वाहट आने की संभावना जताई जा रही है।

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