सिंगरौली: एनसीएल परियोजनाओं से जुड़ी कई कंपनियां डीजल के स्थान पर धड़ल्ले से इंडस्ट्रियल ऑयल का उपयोग कर रही हैं। इस अवैध कारोबार से कंपनियां रोजाना करोड़ों की कमाई कर रही हैं, जबकि राज्य सरकार को भारी राजस्व क्षति उठानी पड़ रही है। सूत्रों के मुताबिक, टैंकरों के जरिए यह ऑयल लाकर कंपनियों में खपाया जा रहा है। सामान्य डीजल और इंडस्ट्रियल ऑयल में लगभग सात रुपये प्रति लीटर का अंतर होने के कारण रोजाना लाखों का अवैध लाभ लिया जा रहा है।
बताया जाता है कि यह खेल लंबे समय से चल रहा है। पिछले माह जयंत क्षेत्र में एक टैंकर पलटने से मामला उजागर हुआ था, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई गई। अब सवाल यह उठ रहा है कि चुप्पी आखिर किन कारणों से है। फिलहाल इंडस्ट्रियल ऑयल के इस काले कारोबार पर रोक लगाने की मांग तेज होती जा रही है।
