मुंबई, (वार्ता) रिलायंस कम्युनिकेशन्स के पूर्व निदेशक अनिल अंबानी ने 10 साल से भी ज्यादा पुराने एक ऋण खाते के मामले में बैंक ऑफ इंडिया के धोखाधड़ी के आरोपों को गलत बताते हुये रविवार को कहा कि उन्हें विशेष रूप से निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है।
श्री अंबानी की ओर से उनके प्रवक्ता द्वारा जारी बयान में कहा गया है, “आश्चर्यजनक रूप से, 10 वर्षों से अधिक के असामान्य अंतराल के बाद, चुनिंदा ऋणदाताओं ने अब एक-एक कर और चुनिंदा तरीके से कार्यवाही शुरू करने का विकल्प चुना है।”
बयान में कहा गया है कि श्री अंबानी सभी आरोपों और अभियोगों का “स्पष्ट रूप से खंडन करते हैं” और कानूनी सलाह के अनुसार उपलब्ध उपायों का पालन करेंगे।
इससे पहले रिलायंस कम्युनिकेशन्स ने आज शेयर बाजार को बताया कि उसे 22 अगस्त को बैंक ऑफ इंडिया से 08 अगस्त का एक पत्र मिला है जिसमें कंपनी और श्री अंबानी तथा कंपनी की तत्कालीन निदेशक मंजरी अशोक कक्कड़ के ऋण खातों को “धोखाधड़ी वाले खाते” के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
प्रवक्ता ने कहा कि श्री अंबानी आरकॉम के बोर्ड में केवल एक गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यरत थे और उन्होंने छह साल पहले, 2019 में, इस पद से इस्तीफा दे दिया था। कंपनी के दैनिक संचालन या निर्णय लेने में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। फिर भी उन्हें विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ऑफ इंडिया ने नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किये बिना आरकॉम के खाते को वर्गीकृत किया है। श्री अंबानी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उन्हें आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराये गये। बैंक ऑफ इंडिया ने उन्हें इस मामले में व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर भी नहीं दिया। आरकॉम के 13 निदेशकों और प्रमुख प्रबंधकीय कर्मियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के बाद, अन्य सभी के खिलाफ एकतरफा नोटिस वापस ले लिया गया जबकि श्री अंबानी के खिलाफ कार्यवाही जारी रखी।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले भारतीय स्टेट बैंक ने भी आरकॉम के ऋण खाते को वर्गीकृत करते हुये श्री अंबानी के खिलाफ कार्यवाही शुरू की थी और इस मामले में शनिवार को श्री अंबानी के ठिकानों पर केंद्रीय जांच ब्यूरो ने छापेमारी भी की थी।
