
राजगढ़।जिले में करोड़ों की लागत से स्वास्थ्य सुविधाओं को स्थापित किया जा रहा है. लेकिन ये सुविधाएं या तो अधूरी है या फिर मरीजों के काम नहीं आ रही है. साधन और संसाधन उपलब्ध है लेकिन वे काम नहीं आ रहे है. जिला अस्पताल में एक ओर जहां चिकित्सकों का अभाव है वहीं दूसरी ओर थेरेपी और चिकित्सा उपयोगी विभिन्न मशीनें या तो कमीं अथवा तकनीकि खराबी के कारण बंद पड़ी है और मरीजों के काम नहीं आ रही है. ऐसे में तय लक्ष्य जिनके अनुसार ये संसाधन जुटाए गए थे वे पूरे नहीं हो पा रहे है.
ऐसे ही जिला अस्पताल में किडनी रोगियों के लिए पिछले 9 सालों में कुल 5 मशीनों को स्थापित किया गया है. ये मशीनें 50 से अधिक रोगियों को ईलाज की सुविधा देेने के लिए लगाई थी लेकिन केवल 3 ही काम कर रही है. ऐसे में केवल 30 मरीजों को ही इसका लाभ मिल पा रहा है. ऐसे में शेष मरीजों की आशाएं डायलिसिस पर नजर आ रही है. यदि ये बाकी दोनों मशीनें सही करवा ली जाएं तो मरीजों को काफी सुविधा हो सकती है.
किडनी के मरीजों को रोस्टर के हिसाब से जिला अस्पताल में ईलाज मिल पाता है. जिले में कुल मिलाकर 30 मरीजों के लिए ही स्लॉट उपलब्ध है जबकि अन्य मरीजों को ईलाज के लिए बाहर जाना पड़ता है. जिले में 2016 में डायलिसिस विभाग की शुरूआत की गई थी. कोई नया मरीज आता है तो उसे मना कर दिया जाता है क्योंकि स्लॉट के अनुसार महीने भर में अथवा सप्ताह में केवल 30 ही मरीजों को डायलिसिस दी जा सकती है. यदि 2 अतिरिक्त मशीनें सुचारू होती तो 50 मरीजों को उपचार की सुविधा मिल सकती थी.
बीमारी हितग्राही नहीं होती, 8 से लेकर 10 हजार रूपए तक खर्च करने पड़ते हैं
जिले में 5 मशीनें हाईटेक कंपनी की मंगवाई गई थी. लेकिन 2 बंद पड़ी है. जबकि हमारे यहां कुशल टेक्रिशियन उपलब्ध है. डायलिसिस विभाग भी महानगरों की तरह सर्वसुविधायुक्त बनाया गया है. हरि सिंह निवासी धतुरिया जीरापुर ब्लॉक ने गत दिनों डायलिसिस के लिए संपर्क किया था लेकिन स्लॉट खाली नही होने के चलते जिला अस्पताल में दाखिला नही मिल सका. ऐसे में मरीज के परिजन हरि सिंह हो जिले से बाहर अन्यत्र अस्पताल में बड़ी राशि खर्च कर के उपचार करवा रहे है. इस प्रकार और भी मरीज जिले में है जिन्हें इस सुविधा की दरकार है क्योंकि वे मोटी रकम खर्च करके अपना ईलाज करवाने में अक्षम है, असमर्थ है. जहां करोड़ों रूपए पानी की तरह चिकित्सा सुविधाओं पर खर्च किए जा रहे है वहीं कुछ ही राशि में ये बड़ी सुविधा फिर से सुचारू हो सकती है. ऐेसे मामलों में क्षेत्र के जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को आगे आकर शासन स्तर से इन सुधारों की मांग करनी चाहिए.
मशीनें हाईटेक लेकिन बंद
जिले में 5 मशीनें हाईटेक कंपनी की मंगवाई गई थी. लेकिन 2 बंद पड़ी है. जबकि हमारे यहां कुशल टेक्रिशियन उपलब्ध है. डायलिसिस विभाग भी महानगरों की तरह सर्वसुविधायुक्त बनाया गया है.
5 मशीनों से डायलसिस चल रहा है, पुरानी 2 मशीन को मैनेज कर रहे है. नई मशीनों के लिए डिमांड की गई है. यूनिट बढऩे से ज्यादा मरीजो को लाभ मिल सकेगा.
नितिन पटेल, सिविल सर्जन जिला चिकित्सालय राजगढ़
