
सीहोर।भारी भरकम लागत से सीहोर से श्यामपुर तक प्रदेश की पहली एफडीआर तकनीक से बनी सड़क एक साल में ही गहरे गडढों में बदल गई है. सड़क में गडढे ही गडढे हैं, इन्हें भरने के लिए पेंचवर्क भी कराया गया, लेकिन वह भी इतना घटिया था कि बारिश भी नहीं झेल पाया और उखड़ गया. अब सड़क पर आवागमन करना वाहन चालकों के लिए बहुत मुश्किल हो रहा है. रोजाना दुपहिया वाहन चालक गिरकर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं.
सड़क निर्माण के समय इस एफडीआर तकनीक का खूब प्रचार किया गया और विभाग ने दावा किया था कि दस साल तक सड़क का कुछ नहीं बिगड़ेगा, लेकिन ठेकेदार, अफसर और जनप्रतिनिधियों के गठबंधन के परिणामस्वरूप सड़क का घटिया निर्माण किया गया जो वर्तमान में पूरी तरह बर्बाद हो गया है.
सीहोर मुख्यालय को श्यामपुर से जोडऩे वाली सड़क का निर्माण एफडीआर तकनीक से किया गया था. इस सडक का निर्माण गत वर्ष 2023 में ही पूरा किया गया है. करीब 30 करोड़ रुपए की लागत से 24 किलोमीटर सडक बनाई गई. सड़क निर्माण को अभी दो साल भी नहीं हुए और सड़क में सैंकड़ों गडढे हो गए हैं. इससे साफ पता चलता है कि सड़क निर्माण में अफसरों और नेताओं ने किस कदर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार का लंबा खेल खेला है. बारिश के पहले इस एफडीआर तकनीक वाली सड़क में पेंकवर्क किया गया, लेकिन वह इतना घटिया था कि सड़क में फिर बडे बड़े गडढे हो गए.
गौरतलब है कि सीहोर विधानसभा क्षेत्र की यह बहुत महत्वपूर्ण सड़क है. सैकड़ों गांवों के लोगों का यहां से रोजाना आवागमन बना रहता है, किसान, छात्र और लोगों को परेशानी का सामना करना पड रहा है. यह सड़क जयपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे से मिलती है. शहरवासी कुरावर, नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, गुना-ग्वालियर सहित राजस्थान जाने के लिए इसी सड़क का उपयोग करते हैं. व्यस्ततम मार्ग होने के चलते इस सड़क का निर्माण किया गया था लेकिन अत्याधुनिक एफडीआर तकनीक से बनी करोड़ों की लागत की सड़क अब हादसों का पर्याय बन चुकी है. वर्तमान में मंडी क्षेत्र से लेकर ग्राम बिजोरी तक अनके गडढे हैं जिनके कारण रोजाना दुर्घटनाएं हो रही हैं. बेकसूर लोग घायल हो रहे हैं.
एफडीआर तकनीक का किया था खूब गुणगान
सड़क निर्माण के दौरान एफडीआर पद्धति के संबंध में बताया गया था कि यह फुल डेप्थ रिक्लेमेशन रिसाइकिलिंग पद्धति है.इसमें कच्ची सडक को उखाड़कर मटेरियल को प्लांट पर ले जाया जाता है. वेस्ट मटेरियल में केमिकल व आवश्यक सामग्री के साथ मिलाकर नया मटेरियल तैयार कर वापस सड़क पर डाला जाता है. इसके बाद हवा के प्रेशर से धूल को साफ करने के बाद सड़क पर फैब्रिक कपड़े को बिछाया जाता है, ताकि वह मॉइश्चराइजर्स को आब्र्जव कर सके. फिर ऊपर डामर के लेप का छिडकांव किया जाता है और फिर मटेरियल को उस पर डालकर रोलर को घुमाया जाता है. इसके लिए विशेष मशीन की जरुरत होती है. एफडीआर पद्धति से सडक निर्माण में लागत भी 50 प्रतिशत रह जाती है. इस पद्धति से बनी सड़क की अवधि काफी अधिक समय तक रहती है.
वर्षाकाल के बाद करेंगे मरम्मत कार्य
श्यामपुर मार्ग की सड़क पर हुए गड्ढोंकी मरम्मत के लिए संबंधित ठेकेदार को निर्देशित किया गया है. जहां गहरे गड्ढे हैं उनमें पेवर ब्लाक लगाकर उन्हें ठीक किया जाएगा. यह काम बारिश के बाद शुरू किया जा सकेगा.
सोनाली सिन्हा
प्रबंधक एमपीआरडीसी
