विदिशा: भाजपा के भीतर अनुशासन का खेल अब सार्वजनिक हो गया है. नगर पालिका में हाल ही में हुए बदलावों को लेकर भाजपा पार्षद असंतुष्ट नजर आ रहे हैं. नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा चार सभापतियों को हटाकर नए सभापति नियुक्त किए गए, लेकिन इस निर्णय ने अंदरूनी कलह को बाहर ला दिया.भाजपा के जिलाध्यक्ष महाराज सिंह दांगी इस पूरे मामले से अनजान बने हुए हैं. उन्हें यह भी जानकारी नहीं थी कि जिस पार्षद ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समक्ष भाजपा की सदस्यता ली थी, उसे पार्टी में नहीं माना जा रहा.
इस पर पार्षद प्रतिनिधि अखिलेश राजपूत ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि उन्होंने वैध रूप से भाजपा सदस्यता ग्रहण की है, रसीद और शुल्क जमा किए हैं, और उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह सदस्यता फर्जी है तो आरोप लगाने वाले इसे स्पष्ट करें.बुधवार को कई भाजपा पार्षद विदिशा रेलवे स्टेशन पर एकत्रित हुए और जिलाध्यक्ष महाराज सिंह दांगी को ज्ञापन सौंपा.
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 19 अगस्त को नगर पालिका परिषद द्वारा पीआईसी का गठन किया गया, जिसमें कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को शामिल किया गया जबकि भाजपा के 27 पार्षदों को दरकिनार किया गया। पार्षदों ने इसे पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाने वाला कदम बताया और उचित कार्रवाई की मांग की.जिलाध्यक्ष दांगी ने कहा कि कुछ निर्दलीय पार्षदों को सभापति बनाया गया है और इस संबंध में जानकारी ली जा रही है. उन्होंने अखिलेश और मनीषा राजपूत के मामले पर कहा कि यह भाजपा का मामला है और जांच जारी है
