नयी दिल्ली 18 अगस्त (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने शिक्षा विभाग की नौकरी में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित मामले में तीन साल से जेल में बंद पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और अन्य दो लोगों को सोमवार को राहत दी।
न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन के सिंह की पीठ ने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) की ओर से दर्ज इस मामले में निचली अदालत द्वारा दो माह के भीतर महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज करने के बाद उन्हें जमानत पर रिहा किया जाना चाहिए।
पीठ ने इस मामले में पश्चिम बंगाल के शिक्षा विभाग के अधिकारी सुबीरेश भट्टाचार्य और शांति प्रसाद सिन्हा की भी जमानत मंजूर कर उन्हें राहत दी।
शीर्ष अदालत ने राहत देते हुए इस तथ्य पर गौर किया कि चटर्जी लगभग तीन साल से जेल में बंद हैं। इस तरह एक आरोपी का जेल में रहना न्याय का मखौल उड़ाने जैसा होगा।
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने उनकी जमानत याचिका दिसंबर 2024 में खारिज कर दी। इसके बाद उन्होंने उस आदेश को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी।
नौकरी देने में कथित अनियमितताओं का यह मामला चटर्जी के पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री रहने के दौरान का है। इस मामले में उन्हें 2022 में गिरफ्तार किया गया। उस समय वह अन्य मंत्रालयों का कार्यभार संभाल रहे थे, लेकिन गिरफ्तारी के तुरंत बाद उन्हें अपनी पार्टी और मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया गया था। विवाद बढ़ने और गिरफ्तारी के बाद तृणमूल कांग्रेस से उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
सीबीआई ने आरोप लगाया है कि चटर्जी नौकरी देने के इस घोटाले के मुख्य साजिशकर्ता है। वह पश्चिम बंगाल केंद्रीय विद्यालय सेवा आयोग और पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में भर्ती प्रक्रियाओं में भारी अनियमितताओं में शामिल थे।
शीर्ष अदालत ने यह भी आदेश दिया कि जहां भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत मंजूरी दी गई हो, उन मामलों में लोक सेवकों के खिलाफ चार सप्ताह के भीतर आरोप तय किए जाएंगे।
शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन आरोपियों के खिलाफ मंजूरी नहीं दी गई है, उनके खिलाफ केवल आईपीसी की धाराओं के तहत आरोप तय किए जाएंगे।
