ई30 के लिए पाँच साल में 5,100 करोड़ के निवेश की जरूरत: सियाम

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (वार्ता) जीवाश्म ईंधनों में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण (ई20) का लक्ष्य हासिल करने के बाद भविष्य की दिशा पर जारी एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2030 तक 30 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण के लिए 5,100 करोड़ रुपये से ज्यादा के निवेश की जरूरत होगी।

भारतीय वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन सियाम द्वारा जारी एक संदर्भ पत्र में बताया गया है कि यदि केंद्र सरकार साल 2030 तक ई25 का लक्ष्य तय करती है तो कुल 2,102.6 करोड़ लीटर इथेनॉल की जरूरत होगी। इसमें 1,205.2 करोड़ लीटर इथेनॉल अनाज से और 897.4 करोड़ लीटर गन्ने से बने होने की संभावना है। यह क्षमता हासिल करने के लिए 3,840 करोड़ रुपये के पूँजी निवेश की आवश्यकता होगी।

इसी प्रकार यदि सरकार ई30 का लक्ष्य तक करती है तो कुल 5,158 करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत होगी ताकि अनाज से 1,338.4 करोड़ लीटर और गन्ने से 996.5 करोड़ लीटर इथेनॉल बनाने की क्षमता हासिल की जा सके।

भारत ने तेल आयात कम करने, ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और नवीकरणीय ईंधनों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए साल 2003 में पाँच प्रतिशत के लक्ष्य के साथ देश के नौ राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों में इथेनॉल मिश्रण का कार्यक्रम शुरू किया था। इसकी शुरुआत धीमी रही और कार्यक्रम में शामिल राज्यों की संख्या बढ़ाये जाने के बावजूद वित्त वर्ष 2016-17 तक हम दो प्रतिशत तक ही पहुँच पाये थे। लेकिन सरकार की नीतियों के कारण 2025 में भारत ने 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया है। खासकर राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति में इथेनॉल बनाने के लिए अनाज के इस्तेमाल की अनुमति देने के बाद इथेनॉल की उपलब्धता बढ़ने से यह लक्ष्य हासिल करना संभव हो सका है।

सियाम ने सुझाव दिया है कि आने वाले समय में इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य तय करने से पहले तीन जरूरी कारकों पर सरकार को ध्यान देना चाहिये। पहला कारक है फीड स्टॉक सिक्योरिटी यानी गन्ना या अनाज अथवा दूसरी फसलों की उपलब्धता जिससे इथेनॉल बनाया जा सके। दूसरा कारक है वाहन निर्माता कंपनियों का अपने इंजनों में बदलाव करने में सक्षम होना। तीसरा कारक है सरकार का समर्थन।

संदर्भ पत्र में कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा से समझौता किये बिना इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार को गन्ने की खेती को तेजी से बढ़ावा देने चाहिये। साथ ही बचे हुये चावल भंडार का भी युक्तिसंगत इस्तेमाल करना चाहिये। इसमें बताया गया है कि यदि सरकार साल 2030 तक ई30 का लक्ष्य रखती है तो 335 लाख टन अनाज और 460 लाख टन गन्ने की जरूरत होगी। इससे खाद्य आपूर्ति श्रृंखला और जमीन, पानी तथा उर्वरक जैसे संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

सियाम ने सरकार से ई85 दुपहिया वाहन खरीदने पर कम से कम 35 प्रतिशत छूट देने की माँग की है ताकि माइलेज में नुकसान के बावजूद ग्राहक उसकी तरफ आकर्षित हो सकें।

 

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