भारत का सटीक जवाब

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अमेरिका में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत को खुलेआम परमाणु हमले की धमकी देकर न केवल अपनी गैर-जिम्मेदाराना मानसिकता उजागर की, बल्कि यह भी साबित कर दिया कि इस्लामाबाद का सैन्य नेतृत्व आज भी 20 वीं सदी की सोच में जी रहा है. यह बयान किसी आत्मविश्वास का नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक शक्ति के प्रति हताशा का प्रतीक है.

भारत ने इस धमकी को “गीदड़भभकी” कहकर खारिज किया. भारत के सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी का स्पष्ट संदेश कि “भारत पाकिस्तान की एटॉमिक ब्लैकमेलिंग में नहीं फंसने वाला” न केवल दृढ़ संकल्प को दर्शाता है, बल्कि यह भी रेखांकित करता है कि भारतीय सेना किसी भी परिस्थिति में जवाब देने में सक्षम है.वास्तविकता यह है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था दिवालिया होने की कगार पर है, आंतरिक आतंकवाद से त्रस्त है और उसकी जनता महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता के बोझ तले कराह रही है. ऐसे में असीम मुनीर का परमाणु हथियार लहराना महज ध्यान भटकाने और घरेलू मोर्चे पर अपनी असफलताओं को छिपाने का हथकंडा है. यह वही पाकिस्तान है, जो आतंकवाद को विदेश नीति का औजार बनाकर दुनिया भर में बदनाम हो चुका है.भारत की रक्षा तैयारी आज अभूतपूर्व है. आधुनिक राफेल लड़ाकू विमान, एस – 400 एयर डिफेंस सिस्टम, पनडुब्बी-आधारित परमाणु प्रतिरोधक क्षमता, ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल और स्वदेशी रक्षा उत्पादन में तेजी—ये सब मिलकर किसी भी दुश्मन को यह संदेश देते हैं कि भारत पर किसी भी तरह का हमला आत्मघाती साबित होगा. भारतीय सेना की “कोल्ड स्टार्ट” जैसी युद्ध रणनीतियां और त्रिस्तरीय परमाणु प्रतिरोध क्षमता पाकिस्तान की किसी भी मूर्खतापूर्ण हरकत का तत्काल और निर्णायक जवाब देने में सक्षम हैं. यह भी उल्लेखनीय है कि असीम मुनीर का यह बयान अमेरिका की धरती से आया. यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर किस माहौल में और किन संकेतों के बीच एक परमाणु धमकी जैसे गैर-जिम्मेदार बयान को अमेरिकी मंच मिला ? अमेरिका, विशेषकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पाकिस्तान के साथ “रणनीतिक दोस्ती” के नाम पर जिस तरह के ढीले-ढाले रवैये अपनाते रहे हैं, उन्होंने इस्लामाबाद को बार-बार हौसला दिया. ट्रंप प्रशासन के समय पाकिस्तान को कई बार बिना जवाबदेही के आर्थिक और सैन्य मदद दी गई, जिससे उसकी हिम्मत और बढ़ी. इस मामले में वाशिंगटन को भी आत्ममंथन करना होगा कि वह आतंक और परमाणु ब्लैकमेल की राजनीति को मंच क्यों दे रहा है ?

भारत का रुख स्पष्ट है कि हम शांति के पक्षधर हैं, लेकिन कमजोरी दिखाना हमारे स्वभाव में नहीं. पाकिस्तान की परमाणु धमकी उसकी कूटनीतिक और सामरिक असफलताओं का प्रमाण है, और भारत की रणनीतिक क्षमता यह सुनिश्चित करती है कि ऐसी किसी भी गीदड़ भभकी का जवाब न केवल मिलेगा, बल्कि ऐसा जवाब मिलेगा जो इतिहास में दर्ज होगा.

अब समय आ गया है कि दुनिया, खासकर अमेरिका, पाकिस्तान जैसे गैर-जिम्मेदार परमाणु राष्ट्रों को खुला मंच देना बंद करे और भारत, अपनी मजबूत रक्षा क्षमता के साथ, इस संदेश को दुनिया तक पहुंचाता रहे कि हम किसी पर पहले हमला नहीं करेंगे, लेकिन जो हमें ललकारेगा, उसका अंजाम तय है.

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