
खंडवा। पूर्व केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री अरुण यादव ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि नगर पालिका अधिनियम 1961 में संशोधन कर निकाय स्तर पर लोकतंत्र को खत्म किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धारा 43(क) और 43(ए) पार्षदों को महापौर व अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार देती हैं, जो लोकतंत्र का “सुरक्षा कवच” है, लेकिन भाजपा सरकार इसे कमजोर कर रही है।
जिला कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता प्रेमांशु जैन ने बताया कि पहले अविश्वास प्रस्ताव की न्यूनतम अवधि 6 महीने थी, जिसे 1 साल कर दिया गया और अब साढ़े चार साल करने का प्रस्ताव है। इससे जनता की नाराजगी बेअसर हो जाएगी। यादव ने कहा कि प्रदेश के ज्यादातर महापौर भाजपा से जुड़े हैं और उनकी कार्यशैली से भाजपा व कांग्रेस दोनों के पार्षद असंतुष्ट हैं। भ्रष्टाचार रोकने के बजाय सरकार पार्षदों की ताकत घटा रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि पार्षदों का सम्मेलन बुलाया जाएगा, जरूरत पड़ी तो हाई कोर्ट में याचिका और सड़कों पर संघर्ष किया जाएगा।
