वेतन न मिलने से संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट

गुना। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत कार्यरत संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी संघ ने पिछले दो महीनों से लंबित वेतन भुगतान की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को संघ के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने सिविल सर्जन को ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा व्यक्त की। कर्मचारियों का कहना है कि प्रदेश सरकार के स्पष्ट निर्देश हैं कि हर माह की 1 से 5 तारीख तक वेतन का भुगतान अनिवार्य रूप से होना चाहिए, लेकिन विभाग की तकनीकी पेचीदगियों और प्रशासनिक लेटलतीफी के कारण कर्मचारी आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं।

कर्मचारियों ने बताया कि वेतन रुकने का मुख्य कारण ‘सार्थक एप’ पर हाजिरी का वेरिफिकेशन न होना है। हालांकि कर्मचारी शासन के नियमों का पालन करते हुए इस एप पर हाजिरी दर्ज कर रहे हैं, लेकिन कई बार तकनीकी खामियों या सर्वर की समस्या के कारण हाजिरी दर्ज नहीं हो पाती है। इस छोटी सी तकनीकी चूक की सजा कर्मचारियों को वेतन कटौती के रूप में भुगतनी पड़ रही है। आरोप है कि कभी सिविल सर्जन कार्यालय तो कभी आरएमओ कार्यालय से दस्तावेजों की खानापूर्ति अधूरी रहने के कारण फाइलें अटकी रहती हैं, जिससे कई कर्मचारियों को दो महीने से फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है। वेतन न मिलने के कारण संविदा कर्मचारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ज्ञापन देने पहुंचे कर्मचारियों ने बताया कि उनके पास मकान का किराया देने, बिजली-पानी के बिल भरने और बच्चों की स्कूल फीस जमा करने तक के पैसे नहीं बचे हैं। बैंक की ईएमआई बाउंस होने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ और मानसिक तनाव बढ़ रहा है। संघ के प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो वे काम बंद कर धरने पर बैठने को मजबूर होंगे। वहीं, सिविल सर्जन ने कर्मचारियों को आश्वासन दिया है कि तकनीकी बाधाओं को दूर कर जल्द से जल्द भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।

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