गोपनीय रिपोर्ट कहीं संगठन से न करा दे छुट्टी

महाकौशल की डायरी

अविनाश दीक्षित

विधानसभा 2023 और बाद में लोकसभा 2024 में मिली जीत का रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जुुट गए हैं, खबर है कि पार्ट टाईम काम कर रहे लोगों को अब संगठन में तरजीह नहीं मिलेगी। नए मुखिया के फरमान को लेकर महाकोशल के जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जिलों में उन जमीनी स्तर के पार्टी नेता- कार्यकर्ता भविष्य के प्रति आशान्वित हो गए हैं, वहीं पार्टी में राजनीति सिर्फ पार्ट टाइम के रूप में करने वाले चिंतित नजर आने लगे हैं। संगठन से पार्ट टाइम जुड़े होने वाले नेता- कार्यकर्ताओं की सेवाएं कितने दिन की और बचीं हुईं हैं ये तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन संगठन स्तर पर ऐसे नेता-कार्यकर्ताओं की सूची बनाने की जिम्मेदारी गोपनीय तरीके से बनाकर मुख्यालय भेजने की तैयारियां कर लीं गईं हैं।

गौरतलब है कि भाजपाई राजनीति का एक प्रमुख केंद्र महाकौशल को माना जाता है जहां से पार्टी का अगला चरण क्या होगा, ये तय किया जाता रहा है। इसलिए आगामी चुनावों में भाजपा कहीं से भी कमजोर न हो इसका मुख्यत: ध्यान अभी से रखा जाने लगा है। वहीं पार्टी के लिए 24 घंटे समर्पित रहने वाले नेता-कार्यकर्ता अपने आप को इस फरमान के बाद से बेहतर स्थिति में पा रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि प्रदेश के नए मुखिया के नजरो-करम उन पर जल्द पड़ेंगे और उन्हें भाजपा में नए पद पर जिम्मेदारियां सौंप दी जाएंगीं।

प्रदेश भाजपा के मुखिया हेमंत खंडेलवाल कार्यकर्ता मिलन कार्यक्रम के जरिए अलग-अलग जिलों व शहरों में जाकर संगठन की नब्ज भी टटोल रहे हैं जो कि आगमी चुनावी रणनीति का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है। बात करें जबलपुर भाजपा की तो यहां पार्टी 3 गुटों में विभाजित सी नजर आती है। पहला गुट सांसद आशीष दुबे का, दूसरा लोक निर्माण मंत्री और तीसरा विधायक अभिलाष पांडे का.. इन तीनों गुटों में भाजपा के नेता-कार्यकर्ता अपने-अपने चहेतों के प्रति समर्पित होते नजर आए हैं जो कि संगठन स्तर पर वरिष्ठों के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। संगठन के वरिष्ठों की मानें तो ये गुटबाजी जितनी जल्दी खत्म हो उतना ही अच्छा रहेगा नहीं तो आने वाले समय में कहीं ये गुटबाजी पार्टी को नुकसान न पहुंचा दे और विपक्ष इसका फायदा न उठा ले, यह बात भी संगठन स्तर के वरिष्ठों और प्रदेश के नए मुखिया हेमंत खंडेलवाल तक पहुंच चुकी है।

एक-दूसरों के हेलमेट के सहारे मिल गया पेट्रोल

पहले बच्चों की सुरक्षा के लिए ई-रिक्शा में बच्चों के आवागमन पर प्रतिबंध तो अब आमजन की जिंदगियों की सुरक्षा के लिए बिना हेलमेट के पेट्रोल नहीं देने का जारी किया गया प्रतिबंधात्मक आदेश… कलेक्टर दीपक सक्सेना के हाल ही में जारी किए गए ये दोनों आदेश इन दिनों सुर्खियों में हैं। जारी आदेश के पहले दो दिनों में जबलपुर में जो दृश्य देखे गए वो काफी हैरान कर देने वाली रहे.. देखा गया कि अधिकांश पेट्रोल पंपों में एक या दो वाहन चालक हेलमेट लेकर पहुंचे जिसके पीछे लंबी कतार में लगे लोग उन दोनों के हेलमेट के भरोसे ही अपने वाहनों में पेट्रोल भरवाते नजर आए। वहीं कुछ पेट्रोल पम्प के सामने हेलमेट की दुकान सजीं दिखीं, जहां से किराए पर हेलमेट दिये जा रहे थे। मतलब साफ था ऐ भाई जरा रूकना, आदेश तो जारी हो गया है लेकिन मैं अपना हेलमेट भूल गया, देना जरा, मैं पेट्रोल भरवाकर वापस करता हूं। कुछ इस तरह का नजारा शहर के अधिकांश पेट्रोल पंपों में नजर आया। गौरतलब है कि जबलपुर जिले में बीते कुछ माहों में हुए सड़क हादसों में देखा गया कि जो व्यक्ति हादसे में मृत हुए उनमें अधिकतर लोग सिर पर हेलमेट नहीं पहने थे। अगर ये दो पहिया वाहन चालक सिर में हेलमेट पहने होते तो सिर में चोट नहीं लगती और इन्हें अपनी जिंदगी से हाथ नहीं धोना पड़ता।

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