नई दिल्ली:उपराष्ट्रपति चुनाव को लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बताते हुए इंडिया गठबंधन अब एक प्रभावशाली ओबीसी चेहरे को मैदान में उतारने की रणनीति पर विचार कर रहा है। कांग्रेस समेत कई दलों की सहमति बिहार के किसी अनुभवी ओबीसी नेता के नाम पर बन सकती है। यह कदम न केवल सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश है, बल्कि भाजपा के खिलाफ राजनीतिक संतुलन बनाने की पहल भी मानी जा रही है।
उपराष्ट्रपति पद को लेकर विपक्षी इंडिया गठबंधन के भीतर हलचल तेज हो गई है। गठबंधन के प्रमुख घटक दलों का मानना है कि यह चुनाव सिर्फ संवैधानिक पद के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक निर्णायक लड़ाई बन सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत सामाजिक-राजनीतिक संदेश देने के लिए गठबंधन की नजर अब ओबीसी उम्मीदवार पर है।
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस इस समय ओबीसी राजनीति को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रही है और इसी कारण वह ओबीसी समुदाय से आने वाले किसी नेता को उम्मीदवार बनाने की पक्षधर है। संभव है कि यह नेता बिहार से हो, जहां ओबीसी समुदाय की राजनीतिक पकड़ और प्रभाव दोनों मजबूत हैं। गठबंधन के कुछ घटक दलों ने भी इस पर सहमति जताई है।
उधर, सरकार की ओर से अब तक न तो विपक्ष से कोई औपचारिक संवाद किया गया है और न ही उपराष्ट्रपति पद के संभावित उम्मीदवार को लेकर कोई संकेत दिए गए हैं। कांग्रेस सरकार से नाराज चल रही है, खासकर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा राहुल गांधी पर की गई टिप्पणियों को लेकर। साथ ही, पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ से जुड़ी चर्चाओं और अफवाहों ने भी कांग्रेस को असहज किया है।
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि धनखड़ से पार्टी का कभी कोई औपचारिक संवाद नहीं हुआ और न ही पार्टी इस मुद्दे पर संजीदा रही। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने उम्मीदवार को लेकर कोई सहयोग नहीं मांग रही है और संकेत दिए हैं कि उम्मीदवार पूरी तरह भाजपा पृष्ठभूमि से होगा।इंडिया गठबंधन की 7 अगस्त की आगामी बैठक में उपराष्ट्रपति पद के लिए साझा उम्मीदवार के नाम पर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। अगर ओबीसी नेता के नाम पर सहमति बनी, तो यह भाजपा के खिलाफ एक रणनीतिक और सामाजिक रूप से प्रभावशाली दांव होगा।
