(प्रियंका सिंह)
छतरपुर: शहर की सड़कों पर इन दिनों ट्रैफिक का हाल बेहाल है। नियम तोड़ना अब आम बात हो चुकी है और कहीं भी नज़र दौड़ाएं, तो वाहन चालकों की लापरवाही साफ दिखाई देती है। हेलमेट न पहनना, मोबाइल पर बात करते हुए गाड़ी चलाना या एक बाइक पर तीन सवार अब ये सब रोजमर्रा का हिस्सा बन चुके हैं।इस लापरवाही के पीछे की बड़ी वजह है,आकाशवाणी चौराहे पर लगे ऑटोमैटिक ट्रैफिक कैमरे का बंद होना। तकनीकी सुधार के नाम पर यह सिस्टम कुछ समय से ठप पड़ा है, जिससे कैमरा चालान की प्रक्रिया थम गई है। जब डिजिटल निगरानी बंद हुई, तो लोगों ने भी ट्रैफिक नियमों को ताक पर रख दिया।
कैमरा बंद, तो नियम भी गायब
बीते साल तक छतरपुर में कैमरा चालान व्यवस्था से 57 लाख रुपए से ज्यादा का जुर्माना वसूला गया था। इसका मतलब था कि लोग नियमों से डरते थे। लेकिन अब जब डिजिटल आंखें सो रही हैं, तो ट्रैफिक भी बेकाबू हो गया है। जैसे ही निगरानी हटी, जिम्मेदारी भी गायब हो गई।
बीते तीन सालों में हादसे के आंकड़े
अगर बीते तीन साल के आंकड़े देखें, तो तस्वीर और भी डरावनी हो जाती है: बीते सालों में कुल सड़क हादसे 2142 हुए है। हादसों में मरने बालों की संख्या 744 और घायलों की संख्या 1886 है। ज्यादातर मामलों में कारण हेलमेट न पहनना, सीट बेल्ट न लगाना, तेज रफ्तार और ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन था।
बाइक पर हेलमेट क्यों जरूरी है?
हेलमेट सिर्फ एक कानूनी चीज़ नहीं, बल्कि सिर की सुरक्षा का सबसे आसान तरीका है। लेकिन शहर की सड़कों पर इसे नजरअंदाज करना अब आदत बन चुकी है। जब कोई बाइक पर बिना हेलमेट तेज रफ्तार से निकलता है, तो वो सिर्फ खुद नहीं, दूसरों की जान भी जोखिम में डालता है।छतरपुर के यातायात प्रभारी बृहस्पति साकेत के अनुसार कैमरों से जुड़ा सर्वर फिलहाल अपडेट हो रहा है, इसलिए चालान की प्रक्रिया अस्थायी रूप से रुकी है। लेकिन जैसे ही तकनीकी काम पूरा होगा, कैमरा फिर से सक्रिय हो जाएंगे
