
नारायणगंज/ मंडला। नारायणगंज का बस स्टैंड, जहाँ प्रतिदिन हजारों यात्री आवागमन करते हैं, आज अतिक्रमण और अव्यवस्था का शिकार हो चुका है। बाजार चौक से लेकर टिकारिया रोड और शासकीय अस्पताल मार्ग तक सड़कों पर और शासकीय भूमियों पर अवैध पक्के निर्माण की भरमार है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि मुख्य सड़कें संकरी हो गई हैं और यातायात बाधित हो रहा है।
स्थानीय प्रशासन और पंचायत, राजनीतिक दबाव में सिर्फ पान-ठेले, चाट और समोसे की दुकानों पर कार्रवाई कर रही है, जबकि जिन स्थायी दुकानदारों ने वर्षों से सरकारी ज़मीनों पर कब्ज़ा कर पक्के निर्माण कर लिए हैं, उनके खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत और जनप्रतिनिधि सिर्फ कमजोर वर्ग को निशाना बना रहे हैं जबकि असली अतिक्रमणकारियों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है।
सूत्रों के अनुसार, मेला चौक से अस्पताल मार्ग तक कई नेतागणों के पक्के निर्माण हैं। यही कारण है कि उनके खिलाफ कार्रवाई से प्रशासन बच रहा है। वहीँ स्कूलों की भूमि पर भी अतिक्रमण हुआ है, लेकिन इन मामलों को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने दिए ज्ञापन, लेकिन कार्रवाई सिर्फ ‘चेहरा देखकर’
पडरिया पंचायत क्षेत्र के जागरूक ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जनपद, तहसील और पंचायत को अतिक्रमण हटाने व व्यवस्था बनाने हेतु आवेदन दिए हैं। बावजूद इसके पंचायत सचिव अभिषेक शर्मा द्वारा सिर्फ अस्थाई दुकानदारों पर ही कार्रवाई की जा रही है। पक्के निर्माणधारियों को छोड़ देना प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि अगर कोई ठेला या दुकान किसी स्थाई दुकान के सामने लग जाती है, तो उस पर जुर्माना करना या हटाना पूर्णतः असंवैधानिक है। संविधान और मध्यप्रदेश भू-राजस्व अधिनियम में ऐसा कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, फिर भी पंचायत अपनी मनमानी पर अड़ी हुई है।
जरूरत थी ठोस नीति की, मिला तालिबानी फरमान
फुटपाथ पर काम करने वाले सब्जी विक्रेताओं और चाय-समोसा विक्रेताओं को व्यवस्थित करने के बजाय उन्हें हटाना पंचायत की सबसे बड़ी विफलता मानी जा रही है। लोगों ने मांग की है कि बस स्टैंड क्षेत्र में अस्थाई दुकानों के लिए उचित स्थल चिन्हित किया जाए और स्थायी अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई हो।
