सतना:शिक्षा की दृष्टि से पिछड़े विन्ध्य की दुर्दशा का जिक्र करते हुए दो वरिष्ट नेताओं ने एक ही दिन संसद और विधानसभा में आवाज बुलन्द कर यह जताया कि उन्हे यह नहीं भूला की शिक्षा के मामले में विन्ध्य अन्य क्षेत्रों से कमजोर है.हांलाकि पहले भी कई अवसरों पर नेताओं ने अपनी बात उठाने का प्रयास किया है,लेकिन कभी कोई ठोस कार्यवाही जमीनी स्तर पर नजर नहीं आयी.
सतना सांसद गणेश सिंह ने एक बार फिर शून्यकाल में उठाया.उन्होने शिक्षा के मामले में कमजोर विन्ध्य का जिक्र करते हुए कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की कमी है.इन परिस्थितियों में सतना में आई आई टी या उसका कोई स्टडी सेन्टर खोला जाना चाहिए.उसके पूर्व भी श्री सिंह कई बार इस प्रकार की मांग उठा चुके हैं.इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई.कहने के लिए सतना में मेडिकल कालेज की स्थापन की गई है.लेकिन वर्तमान में आधे से अधिक विशेषज्ञ प्राध्यापकों का अभाव है.कुछ जिनकी नियुक्ति हुई वो भी प्रबन्धन की कमी के कारण अपने पद से त्यागपत्र देकर छह महीने अन्दर ही यहां से चले गए.
दूसरी तरफ चुरहट विधायक अजय सिंह राहुल ने राज्य विधानसभा में चर्चा के दौरान प्रदेश की स्क्ूल शिक्षा विभाग की दुदशा का मसला उठाया.उन्होने सरकार पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रदेश में जो शिक्षा विभाग की स्थिति चल रही है.उसमें खुलकर नियम प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है.छोटे छोटे बच्चों के कंधों पर किताबों का इतना बोझ लाद दिया गया है कि वे ठीक से खड़े भी नहीं हो पा रहे है.
उन्होने प्रदेश में शिक्षा के नाम पर चल रही खुली लूट का जिक्र करते हुए कहा कि निजी स्कूलों की फीस का कोई नियम प्रावधान नहीं है.हर साल बच्चों को किताबों की सूची पकड़ा दी जाती है.तय दुकान से किताब लेने के लिए मजबूर किया जाता है.श्री सिंह ने अभिभावकों के हो रहे शोषण पर स्थाई रोक लगाने के लिए विभाग को सख्त निर्देश दिए जाने की मांग की.
