
सुसनेर। छतों से गिरता प्लास्टर, झूलते जंग लगे सरिये, बारिश में टपकता पानी, जर्जर फर्श में नौनिहालों का भविष्य गढऩे को मजबूर शिक्षक, कुछ इस तरह के हाल सुसनेर ब्लॉक के अनेक शासकीय स्कूलों के भी हैं. शायद जिम्मेदार झालावाड़ जिले में पिपलोदी ग्राम में हुई घटना का इंतजार कर रहे हैं. जब तक नवीन भवन नहीं बन जाते, इन शालाओं को वैकल्पिक भवनों में संचालित करना है.
नवीन भवन के लिए प्रस्ताव भेजना है, अब कब प्रस्ताव बनेगा, कब स्वीकृत होंगे और कब भवन बनेंगे, तब तक ऐसी मुसीबतों के बीच नौनिहालों को शिक्षित करना है. शासन की नजर में ब्लॉक में 16 ऐसी प्राथमिक शाला है, जो जीर्ण-शीर्ण हैं और इनको तोडऩे के स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश हैं, लेकिन स्कूल अभी तोड़े नहीं गए हैं. जिला कलेक्टर ने आदेश जारी कर पीडब्ल्यूडी विभाग की रिपोर्ट के आधार पर जीर्ण-शीर्ण स्कूल भवनों को तोडक़र उनको वैकल्पिक भवनों में संचालित करने के लिए निर्देशित किया है. नवीन भवन की पूर्ति स्थानीय एवं आपदा प्रबंधन मद, सांसद, विधायक निधि से व्यवस्था करने एवं प्रस्ताव भेजने के लिए निर्देशित किया है.
कुछ के पास कोई विकल्प भी नहीं…
जीर्ण-शीर्ण स्कूलों को वैकल्पिक तौर पर आंगनवाड़ी, अतिरिक्त कक्ष व अन्य भवन में संचालित करने के निर्देश हैं, लेकिन ब्लॉक में 6 स्कूलों के पास कोई विकल्प ही नहीं हैं. ऐसे में ये स्कूल खतरे के बीच जर्जर भवन या खुले आसमान के नीचे चलाने की मजबूरी है. 2 आंगनवाड़ी भवन, 7 अतिरिक्त कक्ष व 1 माध्यमिक शाला का विकल्प है, लेकिन ये संचालित नहीं हो रहे हैं. इनमें 250 के करीब बच्चे अध्ययनरत हैं, जो रोज अपनी जान को खतरे में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं.
इन स्कूलों के भवन होंगे डिस्मेंटल…
ग्राम खिंदियाखेड़ी, मगिसपुर, बडिय़ा, गुंदलावदा, पायली, खेजड़ाखेड़ी, लोधाखेड़ी, बराई, सादलपुर, खेरिया सोयत, करकडिया, कादमी, अन्तरालिया, बाजना का खेड़ा, गुराड़ी सोयत, कन्या शाला सोयत शामिल हैं.
इनका कहना है
ब्लॉक की 187 में से 16 शालाओं के भवन जीर्ण-शीर्ण हैं, जिनको तोडऩे का आदेश है. इनको वैकल्पिक भवन में संचालित करना है. कलेक्टर से नवीन भवन का प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए गए है.
– राधेश्याम पाटीदार, बीआरसी, सुसनेर
