
रायसेन। सांची ब्लॉक की ग्राम पंचायत मऊ पथरई के पुरा मुंगावली गांव में आजादी के सात दशक बीतने के बाद भी एक पक्के, टीनशेड युक्त श्मशान घाट का न होना ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बना हुआ है। जबकि मनरेगा योजना के तहत श्मशान घाटों के निर्माण और विकास के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है।
हाल ही की एक घटना ने इस व्यवस्था की असलियत उजागर कर दी। गांव की एक महिला के निधन के बाद बारिश के बीच जब शवयात्रा निकली, तो कीचड़ और दलदल से होकर ग्रामीण बड़ी कठिनाई से श्मशान तक पहुंचे। वहां टीनशेड न होने की वजह से चारों ओर पन्नी को पकड़कर ग्रामीणों ने शव का अंतिम संस्कार किया। इस दौरान ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिससे क्षेत्र में श्मशान घाट के विकास को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।
