
इंदौर. हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी में काम कर रहे दलित समाज के मजदूर दीपक परमार की करंट लगने से मौत के मामले में परिजनों और समाजजन का आक्रोश सामने आया है. घटना के दो दिन बाद को दलित नेता मनोज परमार बड़ी संख्या में समाजजनों के साथ लसूड़िया थाना पहुंचे और ठेकेदार पर गैर-इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई की मांग की.
परमार ने पुलिस को दिए ज्ञापन में बताया कि मृतक दीपक परमार कंपनी में सुपरवाइजर के रूप में कार्यरत थे. बारिश के दौरान जब निर्माण स्थल पर पानी भर गया, तो ठेकेदार ने उन्हें गड्ढे में उतरकर पानी निकालने का आदेश दिया. इसी दौरान करंट लगने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई.परमार का आरोप है कि यह हादसा ठेकेदार की लापरवाही से हुआ और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. मृतक के दो छोटे बेटे (10 और 13 वर्ष) हैं, और दीपक ही परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे. ऐसे में परमार ने कंपनी से मृतक के परिवार को 25 लाख रुपए मुआवजा देने की भी मांग की. समाजजनों ने थाना परिसर में धरना-प्रदर्शन कर न्याय की मांग को लेकर आवाज बुलंद की. घंटों चले प्रदर्शन के बाद पुलिस द्वारा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने पर प्रदर्शन समाप्त किया. इसके पूर्व मनोज परमार ने मृतक के घर जाकर परिजनों से मुलाकात कर ढांढस बंधाया और शवयात्रा में भी शामिल हुए. प्रदर्शन के दौरान दिनेश कुलपारे, लखन देपाले, संजय सोलंकी, दीपक सोलंकी, संदीप सुनेल, विमल भंडारी, आशुतोष गिरनार, अमित चिनाल, राज परमार, विकास पटेल, अंकित हिरवे, विशाल सारवान और रितेश परमार सहित बड़ी संख्या में समाजजन मौजूद रहे.
