ओंकारेश्वर। ज्योतिर्लिंग वाली यह नगरी सावन में भक्तिमय हो गई है। देशभर के श्रद्धालु इन्हीं दिनों में अपने प्रिय ओंकारजी के दर्शन चाहते हैं। महाराष्ट्र और गुजरात का सावन भी शुरू हो चुका है।
सावन के तीसरे सोमवार, ओंकारेश्वर और ममलेश्वर दोनों जगह आस्था बानो का कौतूहल साफ नजर आया। कई घंटे में दर्शन हुए। नर्मदा का वेग और ओंकारेश्वर के साथ पंचकोसी परिक्रमा पथ पर भी भीड़ दिखी। भगवान शिव के दर्शन के साथ प्रकृति का मनमोहक नजारा भी लोगों ने जी भरकर निहारा।
सावन की तीसरी सवारी निकली
श्रावण मास के तीसरी महा सवारी धूमधाम से निकली। तीसरी महासवारी पर ओंकारजी महाराज अपराह्न 3 बजे कोटितीर्थ घाट पर पहुंचें। ओमकारजी महादेव भगवान का विद्वान पंडितों द्वारा वेद मंत्र के साथ महाभिषेक किया। 251 लीटर दूध, दही, शहद, घी, शक्कर से ओंकारेजी महाराज का षोडशोपचार पूजा अभिषेक किया गया। पंडितों द्वारा गगनभेदी मंत्रोंच्चार के साथ कराया गया।
गुलाल और गुलाब की पंखुड़ियां उड़ीं
महाआरती के साथ महाभिषेक हुआ। इस अवसर पर गुलाल और गुलाब की पंखुड़ी उड़ाई गईं। पवित्र नर्मदाजी के जल में सजी हुई नौकाओं में नौका भ्रमण कराया गया। पानी अधिक होने से नौका संचालन बंद था। इसलिए पालकी घुमाने नौकाएं सीमित रखी गई थी।
ममलेश्वर का भी आकर्षक श्रंगार
दक्षिण तट परश्री ममलेश्वर मंदिर में महाश्रृंगार किया गया। 3 बजे सजी है हुई पालकी मेसवार होकर गौ मुख घाट में सवार होकर श्री ममलेश्वर महाराज धूमधाम से ढोल की थाप पर मंदिर से निकलें।
ऊफनती नर्मदा में पालकियां!
दोनों पालकियों को नर्मदाजी में नौका विहार कराया गया। दोनों पालकियों को गौ मुख घाट पर उतारा गया। दोनों पालकियों के साथ हजारों भक्त भोले शंभू, भोले नाथ का उद्घोष करते हुए 51 ढोल की थप पर भाव विभोर होकर नाचते रहें।
शहर भर में ऐसे घूमे महाराज
पालकियों को धूमधाम और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ाते हुए काशी विश्वनाथ, बालवाड़ी, ,पुराना बस स्टैंड, ,मुख्य मार्ग से जे पी चौक से पुराना पुल पार कर मुख्य बाजार होकर रात्रि 10 बजे वापिस मंदिर पहुंचे।
