आईआईटी खड़गपुर में चार विद्यार्थियों की मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने जतायी गंभीर चिंता

नयी दिल्ली, 28 जुलाई (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में खड़गपुर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) में गत जनवरी से चार विद्यार्थियों की कथित आत्महत्या के मामले में सोमवार को गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल किया, “क्या गड़बड़ है? छात्र आत्महत्या क्यों कर रहे हैं?”
इस साल जनवरी से आईआईटी खड़गपुर परिसर में यह चौथा ऐसा मामला था।
न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने आईआईटी खड़गपुर और शारदा विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की आत्महत्या से संबंधित स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई करते हुए ये उन संस्थानों से पूछा कि क्या उन्होंने इस गंभीर मुद्दे पर विचार किया है?
आईआईटी खड़गपुर की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि इस मामले में 10 सदस्यीय समिति और एक परामर्श केंद्र का गठन गया है। इस तरह से वह मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे छात्रों की पहचान कर रहे हैं। एक फ़ोन नंबर दिया गया है जिस पर कभी भी कॉल कर मदद ली जा सकती है।
पीठ के समक्ष आईआईटी खड़गपुर और शारदा विश्वविद्यालय के वकीलों ने बताया कि दोनों घटनाओं के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
इन तथ्यों से अवगत होने के बाद अदालत ने कहा कि वह आगे कोई टिप्पणी नहीं करेगी और स्पष्ट किया कि मामले में जांच जारी रह सकती है।
पीठ ने कहा, “हमें सूचित किया गया है कि जहां तक शारदा विश्वविद्यालय में हुई घटना का सवाल है, मृतक के पिता की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराई गई है और जांच जारी है। इसे कानून के अनुसार आगे बढ़ने दें।”
आईआईटी खड़गपुर की घटना के संबंध में पीठ ने कहा, “हमें बताया गया कि आत्महत्या की सूचना मिलने के 30 मिनट के भीतर ही संस्थान प्रबंधन ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करा दी थी। इस संबंध में जांच भी जारी है। जांच सही दिशा में जारी रहे।”
शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद की जाएगी।
गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने 21 जुलाई को इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया था।
इससे पहले उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता अपर्णा भट्ट को न्यायमित्र नियुक्त किया था और उनसे मामले में विस्तृत जानकारी देने को कहा था।
सुनवाई के दौरान जब एक वकील ने पीठ को बताया कि चार जून को आईआईटी दिल्ली में एक छात्रा ने आत्महत्या कर ली, लेकिन अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, तो अदालत ने निर्देश दिया कि न्यायमित्र इस मामले की जाँच करें और तदनुसार कार्रवाई करें।
शारदा विश्वविद्यालय की छात्रा आत्महत्या मामले में पुलिस के आने से पहले ही विश्वविद्यालय के कर्मचारियों ने लड़की का शव हटा दिया था।न्यायमित्र भट्ट ने पुलिस अधिकारियों के हवाले से अदालत को बताया कि चूँकि कई लोगों ने उंगलियों के निशान आ गए थे। इसलिए अपराध स्थल की स्थिति कानूनी तौर पर खराब हो गई।
इसी तरह, आईआईटी खड़गपुर मामले में विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने उन्हें (भट) बताया कि पोस्टमार्टम तो हुआ था, लेकिन अभी तक विस्तृत जानकारी नहीं मिली है।
आईआईटी खड़गपुर की मैकेनिकल इंजीनियरिंग की चतुर्थ वर्ष की छात्रा रीतम मंडल की 18 जुलाई को कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हो गई। वह कोलकाता की रहने वाली थी और पाँच वर्षीय दोहरी डिग्री कार्यक्रम में पढ़ रही थी। इस साल जनवरी से आईआईटी खड़गपुर परिसर में यह चौथा ऐसा मामला था।
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा विश्वविद्यालय के छात्रावास में बीडीएस द्वितीय वर्ष की छात्रा ज्योति शर्मा की कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हो गई।
अदालत ने पहले कहा था कि ‘कुछ गड़बड़ है’।
शीर्ष न्यायालय ने 25 जुलाई को भी चिंता जताई थी। न्यायालय ने आत्महत्याओं की बढ़ती की समस्या से निपटने के लिए 15 दिशानिर्देश जारी किए थे, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल को बढ़ाने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने उन दिशानिर्देशों को देशभर में लागू करने का निर्देश दिया था।

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