जबलपुर: जहां एक ओर आयुध निर्माणी खमरिया व इसके आसपास के इलाके में तेंदुओं की चहलकदमी बढ़ती जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ निर्माणी के कर्मचारियों को भयमुक्त करने के लिए वन विभाग के हाथ अभी तक एक भी तेंदुआ नहीं लग सका है। ऐसे में जो चौंकाने वाली खबर निकलकर सामने आ रही है उसने खमरिया के कर्मचारियों व रहवासियों की चिंता दस गुना और अधिक बढ़ा दी है।
सामने आ रही खबर के मुताबिक वन विभाग के जिम्मेदारों ने ओएफके प्रबंधन के आला अधिकारियों से पिंजरे लगाने की बात पर असमर्थता जताते हुए कहा है कि उनके पास पिंजरे इतनी मात्रा में नहीं है कि रामपुर की पहाड़ियों से लेकर खमरिया, जीसीएफ सीओडी, परियट, खंदारी के क्षेत्र में हर जगह पिंजरा लगा दिए जाएं। वन विभाग के द्वारा पिंजरे को लेकर जताई गई अमसमर्थता की ओएफके के अधिकारी अविनाश शंकर ने पुष्टि की और नवभारत को बताया कि ओएफके प्रबंधन ने वन विभाग को पत्र लिख दिया है और कहा है कि आप लोग पिंजरे की डिजाइन बनाकर दीजिए, ओएफके प्रबंधन अपने वर्कशॉप में खुद पिंजरा बनवाएगा और फिर ओएफके के अंदर तेंदुओं के मूवमेंट वाले क्षेत्रों में पिंजरा लगाएगा। इसके साथ ही प्रबंधन अपने खुद के खर्चे पर इन पिंजरों में शिकार या चारा भी रखेगा जिससे कि तेंदुआ आकर्षित होकर इन पिंजरों में फंसे। ओएफके प्रबंधन की माने तो इन पिंजरों में तेंदुआ के फंसने के बाद फिर रेस्क्यू के लिए वन विभाग को सूचना दी जाएगी।
रस्मअदायगी के लिए रखा खली पिंजरा
ओएफके कर्मचारियों ने नवभारत को जानकारी देते हुए बताया कि वन विभाग के द्वारा रस्मअदायगी के नाम पर एक पिंजरा बस रख दिया गया है जो कि खाली है। इसमें वन विभाग द्वारा शिकार नहीं रखा गया है जिससे कि तेंदुआ आकर्षित हो और फिर इसमें फंस सके। कर्मचारियों की माने तो एक ये सबसे मुख्य वजह है जिस कारण ओएफके के पिंजरे में तेंदुआ नहीं फंस सका है। गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों में जीसीएफ, खमरिया और फैक्टरी के अंदर तेंदुओं की चहलकदमी कई बार देखी जा चुकी है। इतना ही नहीं दो दिन पहले खमरिया के एन टाइप के पास एक तेंदुआ ने गाय के बछड़े पर भी हमला कर दिया था जिसके बाद से स्थानीय रहवासियों और निर्माणी के कर्मचारियों में तेंदुओं को लेकर खासी दहशत व्याप्त है।
