विदिशा। शहर में बड़ी संख्या में ऐसे पुराने और जर्जर मकान मौजूद हैं, जिनकी उम्र पूरी हो चुकी है, फिर भी उनमें लोग रह रहे हैं और व्यापार कर रहे हैं। बारिश के मौसम में इन भवनों के गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है, जिससे न केवल मकान में रहने वाले लोग खतरे में हैं, बल्कि आस-पास के रहवासी भी जोखिम में हैं।
नगर पालिका द्वारा इन भवनों को लेकर वर्षों से केवल नोटिस जारी करने का खेल चलता रहा है, लेकिन ठोस कार्रवाई अब तक नहीं हो पाई। कुछ दिन पहले कलेक्टर ने नगर पालिका को सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन हालात जस के तस हैं। हाल ही में बांसकुली क्षेत्र में एक क्षतिग्रस्त मकान का हिस्सा स्वयं निवासियों ने गिरा दिया। दोनों ओर बेरिकेड्स लगाकर अस्थायी सुरक्षा की गई, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।
हैरानी की बात है कि नगर पालिका खुद अपनी जर्जर इमारतों को भी नहीं गिरा पा रही है। सिटी कोतवाली के पास स्थित पुराना नगर पालिका भवन बुरी तरह जर्जर है, जहां बैंक शाखा और दुकानों का संचालन हो रहा है। टाउन हॉल की इमारत भी इसी हालत में है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के बाद ही जागेगा। कई भवनों में कानूनी विवाद और किरायेदारों की मौजूदगी के चलते कार्रवाई नहीं हो पा रही है, लेकिन इन विवादों के बीच लोग अपनी जान खतरे में डालकर जीवन और व्यापार चला रहे हैं।
सरकारी इमारतों की हालत भी अलग नहीं है। पीतलमील चौराहे पर स्थित उद्योग विभाग का भवन गिरने की कगार पर है और शराबियों का अड्डा बन चुका है। जिला शिक्षा अधिकारी का कार्यालय भी बेहद जर्जर हालत में है, फिर भी कार्यालय यथावत चल रहा है।
नगर पालिका सीएमओ दुर्गेश ठाकुर ने बताया कि 33 भवन मालिकों को दो बार नोटिस दिए गए हैं। अगर मरम्मत या ध्वस्तीकरण नहीं किया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं पुराने नपा भवन में संचालित बैंक व दुकानों को चार महीने में खाली करने के नोटिस जारी किए गए हैं।
नगर पालिका अध्यक्ष प्रीति राकेश शर्मा ने कहा है कि पुराने जर्जर भवनों को गिराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है और पूर्व नपा भवन को डिस्मेंटल करने के लिए जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा।
