नई दिल्ली, 26 जुलाई (वार्ता) नगदी बरामद होने के मामले में विवादों से घिरे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की रिट याचिका पर
उच्चतम न्यायालय सोमवार को सुनवाई करेगा। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ उनकी याचिका पर विचार करेगी।
मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई ने 23 जुलाई को उस याचिका पर होने वाली सुनवाई से अपने आप को अलग करते हुए कहा कि इस मामले में एक पीठ गठित की जाएगी।
अपनी याचिका में न्यायमूर्ति वर्मा ने दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर रहने के दौरान अपने सरकारी आवास से कथित तौर पर नगदी मिलने के मामले में आंतरिक जांच प्रक्रिया को चुनौती दी है। उन्होंने दिल्ली से इलाहाबाद उच्च न्यायालय स्थानांतरण करने और संबंधित जांच समिति द्वारा न्यायाधीश का काम करने से रोकने के फैसले की वैधता को भी चुनौती दी है।
मुख्य न्यायाधीश ने इस मामले में सुनवाई से अपने आप को अलग करते हुए कहा था कि चूँकि वह उनके स्थानांतरण के निर्णय का हिस्सा थे, इसलिए उनके लिए इस मामले में सुनवाई करना उचित नहीं होगा। शीर्ष अदालत की इस आंतरिक रिपोर्ट में उनके खिलाफ शुरू की गई कार्रवाई और उन्हें हटाने की सिफारिश भी शामिल है।
न्यायमूर्ति वर्मा को इस वर्ष मार्च में उनके आवास पर कथित तौर पर नकदी मिलने के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय से उनके मूल न्यायालय, इलाहाबाद उच्च न्यायालय में स्थानांतरित कर दिया गया था। उन्होंने एक रिट याचिका में आंतरिक प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया, जिसमें उन्होंने निष्पक्ष सुनवाई और उचित प्रक्रिया से इनकार करने का दावा किया।
उन्होंने न्यायाधीशों की समिति द्वारा जाँच शुरू करने से पहले औपचारिक शिकायत न होने का मुद्दा भी उठाया। न्यायमूर्ति वर्मा ने तर्क दिया कि 22 मार्च, 2025 को उनके खिलाफ आरोपों का खुलासा करते हुए एक प्रेस विज्ञप्ति वेबसाइट पर अपलोड करने (शीर्ष न्यायालय के) से मीडिया में तीव्र अटकलें लगाई गईं, जिससे उनकी प्रतिष्ठा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन हुआ।
न्यायमूर्ति वर्मा ने यह भी तर्क दिया कि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा गठित न्यायाधीशों की समिति ने उन्हें आरोपों का खंडन करने या गवाहों से जिरह करने का अवसर नहीं दिया।
