
सीधी ।पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजयसिंह ने कहा है कि पूरे प्रदेश में इस साल फिर खाद का संकट गहरा गया है । प्रदेश में खाद वितरण की पारदर्शी व्यवस्था लागू करने की सख्त जरूरत है | किसान हलाकान हो रहे हैं । प्रदेश को इस साल जरूरत से आधी मात्रा में ही खाद अभी तक आवंटित हुई है । किसानों में खाद लेने के लिए मारा मारी मची हुई है । उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव से आग्रह किया है कि केन्द्र सरकार को पत्र लिखने में समय जाया न करें बल्कि व्यक्तिगत रूचि लेकर स्वयं दिल्ली जाकर या फोन पर केन्द्र सरकार से बात करें । कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान तो मध्य प्रदेश के ही हैं तो फिर क्या दिक्कत है? प्रदेश में खाद की किल्लत क्यों हो रही है ?
पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मुख्यमंत्री को सचेत करते हुए कहा कि किसानों का आक्रोश बढ़े उसके पहले ही खाद की पर्याप्त व्यवस्था करवायें अन्यथा अप्रिय स्थिति निर्मित होने में देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि प्रायवेट दुकान वाले वर्तमान परिस्थितियों का फायदा उठाकर आपदा में अवसर तलाश रहे है । यूरिया की काला बाजारी हो रही है और ब्लैक में दोगुने दामों पर बिक रही है । उसी किसान को यूरिया मिल रही है जो न चाहते हुए भी नैनो यूरिया की बोतल खरीद रहा है । डीएपी की जगह एनपीए लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है जबकि इस वक्त मक्का और धान के लिए यूरिया की सख्त जरूरत है ।
सिंह ने कहा कि दो बोरी यूरिया के लिए भी किसान केन्द्रों पर रात काट रहे है । कई दिन चक्कर काटने के बाद भी आवश्यकता से कम यूरिया मिल रहा है । कुछ ही किसानों को प्राइवेट दुकानो से खाद लेने के लिए टोकन दिये जा रहे है और बाकी आधे से ज्यादा किसान मायूस होकर लौट रहे है । उन्होंने कहा कि अमानक बीज के मामले भी सामने आए है जो बोनी के बाद अंकुरित ही नहीं हुए । ताजा उदाहरण देवास के खातेगांव का है । यहां कोलारी गांव के आठ किसानों ने 25 क्विंटल सोयाबीन बीज 6900 के भाव खरीदा जो आज तक अंकुरित नहीं हुआ । सीहोर जिले के 18 गांवों में बीजोपचार पावडर खरीद कर बोनी की गई लेकिन पूरी फसल खराब हो गई । सतना में बायर कंपनी का डुप्लीकेट फँगीसाइड बनाने का कारोबार पकड़ा गया है । सिवनी में गुजरात से लाई गई मिसब्रांड डीएपी खाद पकड़ी गई । खाद बीज वितरण को लेकर पूरे प्रदेश में अराजकता का माहौल बन गया है ।
अजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को भी निर्देश दिये जायें कि वे किसानों से दुर्व्यवहार न करें । उन्हें खाद के लिए चक्कर न कटवाऐं । जितना स्टाक हो उतने की किसानों को टोकन दें और बाकी को अगले दिन बुलायें । घंटों और रात रात भर इन्तजार करने के बाद उन्हें वापस कर दिया जाता है । इन परिस्थितियों से निपटने के लिए पारदर्शी व्यवस्था की जरूरत है जिससे किसानों में आक्रोश न फैले |
