
इंदौर। इंदौर में फर्जी रजिस्ट्री करने का गिरोह चल रहा है। इसका खुलासा आज करीब 18 फर्जी रजिस्ट्री पकड़ में आने बाद हुआ है। करीब 100 करोड़ रुपए मूल्य की जमीन और प्लाट की फर्जी रजिस्ट्रियां हो गई। खास बात यह है कि बिना बेचे ही जमीन की रजिस्ट्रियां हो गई और मूल दस्तावेज गायब कर दिए गए। मामले में अब कलेक्टर ने वरिष्ठ जिला पंजीयक को एफआईआर करने के आदेश दिए है।
शहर में पिछले कई सालों से फर्जी रजिस्ट्री करने का काम चल रहा है। इसमें मूल जमीन और प्लॉट मालिकों की शिकायत पर जांच में यह मामला पकड़ में आया है। इसमें मूल दस्तावेज भी विभाग से गायब कराए गए हैं , ताकि षड्यंत्र का भांडा नहीं फूटे, लेकिन प्लॉट और मालिकों ने मूल दस्तावेज प्रमाणिक करवाए तो फर्जी दस्तावेज बनने का मालूम पड़ा।
करीब एक साल पहले बिना बेचे ही मुंबई निवासी के प्लॉट की फर्जी रजिस्ट्री होने का मामला पकड़ में आया था। इसके बाद कलेक्टर को कई शिकायत मिली। कलेक्टर ने जांच कमेटी बनाकर रिपोर्ट देने का कहा और कमेटी ने रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट में 100 करोड़ रुपए मूल्य के जमीन और प्लॉट के फर्जी रजिस्ट्री होना पाया गया है। अब उक्त मामले में वरिष्ठ जिला पंजीयक को कलेक्टर ने एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए है।
एफ आई आर दर्ज : शर्मा
वरिष्ठ जिला पंजीयक दीपक शर्मा ने बताया कि 18 दस्तावेज फर्जी पकड़ में आए है। फर्जी दस्तावेज के आधार और कलेक्टर के निर्देश एफआईआर दर्ज करवा दी है।
यह है मामला
दरअसल मामला यह है कि मुंबई निवासी ने कलेक्टर को जनवरी में शिकायत की थी कि उनके प्लॉट की रजिस्ट्री हो गई है और नामांतरण भी कर दिया गया है। मुंबई निवासी 30 – 35 साल से इंदौर नही आए थे। इस मामले की जांच के आदेश कलेक्टर ने वरिष्ठ जिला पंजीयक दीपक शर्मा को दिए थे। जांच में नगर निगम में नामांतरण के लिए लगाई रजिस्ट्री और दस्तावेज की सूक्ष्म जांच की गई। जांच में वरिष्ठ जिला पंजीयक दीपक शर्मा ने नामांतरण में लगाई रजिस्ट्री फर्जी पाई गई। इसके बाद नगर निगम के झोन 3 में संपूर्ण दस्तावेज जब्त कर दो लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
कुछ और शिकायतों को लेकर जांच कमेटी बनाई
ऐसे मामलों को लेकर कलेक्टर आशीष सिंह ने 5 सदस्यीय कमेटी बनाई, जिसमें जिला पंजीयक चक्रपाणि मिश्रा को जांच सौंपी। इसके बाद वरिष्ठ जिला पंजीयक दीपक शर्मा ने जांच रिपोर्ट को विस्तार से देखा तो 20 मामले में फर्जी रजिस्ट्री होना पाया गया। शर्मा ने बताया कि 18 मामले और फर्जी रजिस्ट्री के सामने आए है और 2 मामलों में पहले एफआईआर की जा चुकी है। आज कलेक्टर के आदेश से 18 मामलों में एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए है।
हेराफेरी का कृत्य : द्विवेदी
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद द्विवेदी ने कहा कि पुराने समय के रजिस्ट्री के दस्तावेज पर शंका उत्पन्न हुई है। यह कही न कही प्रमाणिक दस्तावेज के साथ विभाग के कतिपय लोगों द्वारा भू माफियाओं के साथ मिलजुलकर हेराफेरी करने का कृत्य किया गया है। इसको वरिष्ठ जिला पंजीयक द्वारा पकड़ा गया है, जिसकी तह में जाकर गहराई से जांच की जाना चाहिए। पंजीयन कार्यालय के सीसीटीवी कैमरे बार बार बंद होना भी शंका के जन्म देते है फर्जी रजिस्ट्री बन जाती है। मूल दस्तावेज गायब हो जाते हैं।
