
अनूपपुर। कोतमा पुलिस को साइबर ठगी के एक सनसनीखेज मामले में बड़ी सफलता मिली है। पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान के निर्देशन एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक इसरार मंसूरी तथा एसडीओपी आरती शाक्य के मार्गदर्शन में कोतमा थाना प्रभारी रत्नांबर शुक्ला की टीम ने साइबर ठगी गिरोह के शातिर सदस्य सौरभ शर्मा (32 वर्ष) को विदिशा जिले से गिरफ्तार किया है। आरोपी सौरभ शर्मा ने अपने गिरोह के साथ मिलकर नगर के व्यापारी आशीष ताम्रकार पुत्र भाजपा नेता अवधेश ताम्रकार से पिछले 8 वर्षों में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लगभग 45 लाख की ठगी की।
ऐसे रची गई थी ठगी की योजना
वर्ष 2017 में आशीष ताम्रकार को वायदा बाजार से 23 लाख की राशि प्राप्त होनी थी, जिसकी जानकारी इस गिरोह को लग गई। इसके बाद नीमच थाना अधिकारी बनकर संपर्क किया गया और उस रकम को हवाला की राशि बताकर डराने और धमकाने का सिलसिला शुरू हुआ। बाद में आरोपी अलग-अलग मोबाइल नंबरों से सीबीआई अधिकारी, जज, पुलिस अधिकारी और हाईकोर्ट वकील बनकर आशीष ताम्रकार को डिजिटल रूप से अरेस्ट करते रहे। फर्जी कॉल, वीडियो स्क्रीन पर पुलिस सायरन और नकली आदेश दिखाकर लगातार रुपयों की मांग की जाती रही। डरे सहमे व्यापारी ने गिरफ्तारी के डर से लगातार पैसे खातों में ट्रांसफर कर दिए।
मोबाइल लोकेशन आरोपी हुआ गिरफ्तार आरोपी
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर दो विशेष टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने मोबाइल नंबरों की लोकेशन ट्रेस कर आरोपी सौरभ शर्मा को गिरधर कॉलोनी विदिशा से गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल और ठगी से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं। आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 419, 420, 34 के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में पेश करने के बाद 4 दिन की पुलिस रिमांड में लेकर पूछताछ की जा रही है।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी
इस हाई-प्रोफाइल गिरोह के मुख्य सरगना महेंद्र शर्मा की 2022 में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। उसके खिलाफ 30 से अधिक संगीन अपराध दर्ज थे। दूसरा आरोपी रवि डेहरिया की भी दो माह पूर्व सड़क हादसे में मौत हो चुकी है। वहीं अन्य फरार आरोपियों में लकी कुमावत (खंडवा), चित्रांश ठाकुर सहित कई सदस्य शामिल हैं, जिनकी तलाश में पुलिस छापेमारी कर रही है।
फर्जी कंपनियों के माध्यम से रचा जाल
गिरोह ने भोपाल में आर बी ट्रेडर्स, तिरुपति फिनटेक जैसे नामों से फर्जी कंपनियाँ खोलकर ठगी का पूरा सेटअप तैयार किया था। जब Oभोपाल में शक हुआ तो वे विदिशा में नई पहचान के साथ कंपनी खोलकर साइबर ठगी जारी रखते रहे। गिरफ्तार सौरभ शर्मा न केवल ठगी करता था, बल्कि प्राइवेट काम और जमीन दलाली में भी संलिप्त रहा है। इस कार्रवाई की मॉनिटरिंग स्वयं पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान कर रहे थे। उनकी टीम में थाना प्रभारी रत्नांबर शुक्ला, लालजी श्रीवास्तव, रामखेलावन यादव, मनोज उपाध्याय, राजेंद्र अहिरवार और पंकज मिश्रा की सक्रिय भूमिका रही।
