भोपाल। मुनि श्री प्रमाण सागर ने कहा कि उत्तेजना में व्यक्ति सोचने-समझने की शक्ति खो देता है और बिना सोचे कठोर शब्द बोलकर पश्चाताप करता है। यह उसकी मानसिक कमजोरी का संकेत है। उन्होंने बताया कि ईगो, दूसरों पर नियंत्रण की इच्छा, त्वरित प्रतिक्रिया की आदत और अस्वीकृति को न सह पाना उत्तेजना के चार मुख्य कारण हैं। इसका समाधान “भावनायोग” है। रोजाना पांच मिनट तक “मुझे शांत रहना है, संयम रखना है, सहज रहना है, सकारात्मक रहना है” इन वाक्यों का अभ्यास करें। मुनि श्री के प्रवचन गुरुकुलम् अवधपुरी में प्रतिदिन प्रातः और सायं होते हैं।
उत्तेजना पर नियंत्रण के लिए मुनि श्री ने बताया भावनायोग का उपाय
