मुख्यमंत्री चेहरा व सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस व राजद में शीतयुद्ध

दिल्ली डायरी

प्रवेश कुमार मिश्र

बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते देख इंडिया गठबंधन में शामिल राजद की ओर से मुख्यमंत्री चेहरा तेजस्वी यादव को घोषित करने के लिए कांग्रेस पर दबाव डाला जाने लगा है. चर्चा है कि राजद सुप्रीमों लालू प्रसाद यादव तब तक गठबंधन सीट पर अंतिम मुहर लगाने को तैयार नहीं हैं जबतक उनके पुत्र को गठबंधन की ओर से औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया जाता.

हालांकि कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकार इस पर चुनाव बाद निर्णय करने के पक्षधर हैं इसलिए वे सीधे तौर पर कुछ कहने के बजाय कांग्रेस समर्थित निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के माध्यम से इस संबंध में बयान दिला रहे हैं. दिल्ली में चर्चा है कि पप्पू यादव को कांग्रेस पार्टी ने एक सोची-समझी रणनीति के तहत पहली बार किसी महत्वपूर्ण बैठक में औपचारिक रूप से शामिल कराकर राजद पर दबाव बना दिया है. चर्चा है कि कांग्रेस पार्टी बिहार विधानसभा के 243 सीटों में से कम से कम 60 सीट पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है लेकिन राजद की ओर से उसे ज्यादा से ज्यादा 50 सीट देने की बात की जा रही है.

मतदाता विशेष पुनरीक्षण को लेकर पक्ष व विपक्ष में वाकयुद्ध

बिहार में चल रहे मतदाता विशेष पुनरीक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्ण रूप से रोक लगाने से इंकार किए जाने के बाद भी पक्ष व विपक्ष आमने-सामने हैं. चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कठघरे में खड़ा करते हुए कांग्रेस,राजद समेत इंडिया गठबंधन में शामिल दलों की ओर से पटना समेत पूरे प्रदेश में विरोध प्रदर्शन किया गया है वहीं भाजपा व जदयू की ओर से इसे सही मानते हुए जनजागृति कार्यक्रम चलाया जा रहा है.

चर्चा है कि पुनरीक्षण कार्यक्रम के कारण जहां एक तरफ बंगलादेशी रोहिंग्या मतदाता को चिंहित कर बाहर किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर वर्षों से बिहार छोड़ चुके प्रवासी मतदाताओं को भी एकल मतदान के नियम के तहत दूसरे प्रदेशों से नाम हटाकर वापस बिहार में अपने को सत्यापित करना पड़ रहा है. चर्चा है कि विपक्षी दलों को इस बात को लेकर डर सता रहा है कि इस प्रक्रिया के तहत कहीं उनके समर्थक मतदाताओं का नाम तो नहीं काट दिया जाएगा.

संघ के साथ समन्वय बैठाने में जुटे भाजपाई रणनीतिकार

भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा , यह सवाल अभी यक्ष प्रश्न के रूप में बना हुआ है. चर्चा है कि संघ के पसंद और नापसंद के कारण भाजपा अध्यक्ष के नाम को लेकर स्थिति उलझी हुई है. हालांकि संघ ने विभिन्न मौकों पर स्पष्ट किया है कि वह भाजपा के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं देती बल्कि सलाह मांगने पर सुझाव भर देती है. दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पहली बार किसी महिला के हाथ में नेतृत्व देने को लेकर भाजपा में जबरदस्त तैयारी चल रही है लेकिन संभावित दावेदारों में दर्जनों सुयोग्य उम्मीदवार होने के कारण एकराय बनाना मुश्किल हो रहा है. हालांकि कहा जा रहा है कि सरकार ने पिछले दिनों राज्यपालों की नियुक्ति व मनोनीत राज्यसभा सदस्यों के नाम पर विचार करते संघ के सुझाव को महत्व दिया है जिससे यह कहा जा रहा है कि अब संघ व सरकार के बीच तनाव नाम की कोई परिस्थिति नहीं बची है. फिर भी पार्टी के उच्च पदस्थ नेता भी नए अध्यक्ष के नाम के बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है.

क्या 75 के उम्र के बाद संघ प्रमुख व प्रधानमंत्री कोई कठोर निर्णय लेंगे?

पिछले दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत के कथित बयान जिसमें 75 साल उम्र के बाद राजनीति से अलग होने का संदेश मिलता है उसको लेकर राजनीतिक गलियारों में खुब चर्चा हो रही है. कांग्रेस पार्टी की ओर से इस संबंध में बयान भी दिया गया था. उक्त बयान के आलोक में कहा जा रहा है कि क्या संघ प्रमुख व प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 75 वर्ष की आयु पूर्ण करने के बाद कोई अप्रत्याशित राजनीतिक निर्णय लेते हुए संन्यास ले लेंगे या मुख्यधारा की राजनीति से किनारा कर लेंगे. हालांकि इस संबंध में औपचारिक रूप से किसी भी तरह का बयान नहीं दिया गया है.

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