सौर ऊर्जा में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा: डोमेस्टिक सोलर मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक समग्र दृष्टिकोण

लेखक: ज्ञानेश चौधरी, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, विक्रम सोलर

जैसे-जैसे भारत अपने रिन्यूएबल एनर्जी गोल्स की ओर बढ़ रहा है, बातचीत को कैपेसिटी बिल्डिंग से आगे भविष्य के लिए तैयार सोलर मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम बनाने की ओर ले जाना चाहिए। हाल की रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत ने इस साल पहले ही 100 गीगावाट (GW) की इंस्टॉल्ड सोलर कैपेसिटी को पार करने का ऐतिहासिक पड़ाव हासिल कर लिया है और डोमेस्टिक सोलर मैन्युफैक्चरिंग अभी और बढ़ने की संभावना है। ये सिर्फ ग्रोथ की बात नहीं-यह क्लीन टेक्नोलॉजी में भारत की रणनीतिक स्वतंत्रता की आकांक्षा को रेखांकित करता है।

आज हम जो बदलाव देख रहे हैं, वो सालों की नीतिगत प्रगति और उद्योग के परिपक्व होने का नतीजा है। जब सोलर सेक्टर अपनी शुरुआती अवस्था में था, तब शायद ही कोई आज के मजबूत मैन्युफैक्चरिंग ईकोसिस्टम की कल्पना कर सकता था। आयात-निर्भर बाजार से लेकर अब एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की यात्रा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी आत्मनिर्भरता के प्रति प्रतिबद्धता को दिखाती है।

हालांकि मॉड्यूल ने सुर्खियां बटोरी हैं, लेकिन असली बदलाव तब आएगा जब मॉड्यूल प्रोडक्शन को सपोर्ट करने वाली सप्लाई चेन को और मजबूत किया जाएगा। सोलर की आत्मनिर्भर वैल्यू चेन कई जरूरी हिस्सों से गुजरती है- पॉलीसिलिकॉन, इंगोट्स और वेफर्स से लेकर सेल्स और मॉड्यूल्स तक, साथ ही बैलेंस ऑफ सिस्टम कंपोनेंट्स। हर हिस्से पर खास ध्यान और भारी निवेश की जरूरत है ताकि सही मायने में मैन्युफैक्चरिंग में स्वतंत्रता हासिल हो सके।

सरकार का समर्थन, जैसे बेसिक कस्टम्स ड्यूटी (BCD), अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल्स एंड मैन्युफैक्चरर्स (ALMM), और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम्स ने एक मजबूत आधार तैयार किया है। इन नीतियों ने घरेलू कंपनियों के लिए ऐसा माहौल बनाया है कि वे अपनी क्षमता बढ़ाने और टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने में निवेश कर सकें।

यहीं पर एक अच्छी तरह से संरेखित नीति और नियामक ढांचा बहुत जरूरी हो जाता है। जैसा कि क्रिसिल की हालिया रिपोर्ट में भारतीय सोलर पावर मार्केट के स्ट्रैटेजिक असेसमेंट में बताया गया है, डोमेस्टिक सोलर मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार बनाए रखने के लिए PLI इंसेंटिव्स का समय पर वितरण, ALMM जैसी योजनाओं में टेक्नोलॉजी को शामिल करना, और स्केल को सपोर्ट करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता जरूरी है। दक्षता और विश्वसनीयता पर रणनीतिक जोर- साथ में स्किल डेवलपमेंट और लॉजिस्टिक्स सिस्टम का सपोर्ट-भारत को अपने सोलर एक्सपोर्ट्स की वैल्यू बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मदद कर सकता है।

आगे का विजन स्पष्ट है। सोलर पार्क, मजबूत सप्लाई चेन, और रिजनल मैन्युफैक्चरिंग हब को मजबूत वित्तीय, लॉजिस्टिक्स, और स्किल सपोर्ट के साथ जोड़ा जाना चाहिए। प्रोजेक्ट-बेस्ड ग्रोथ से मैन्युफैक्चरिंग-लेड एक्सपेंशन की ओर उद्योग का विकास भारत की रिन्यूएबल एनर्जी स्टैटजी में एक मूलभूत बदलाव को दिखाता है। आत्मनिर्भर भारत अब सिर्फ एक नारा नहीं है-ये एक मापने योग्य हकीकत है, जो पूरे देश के मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स में आकार ले रही है।

विक्रम सोलर में, हम इस बदलाव को गति देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत को स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकी में निर्भरता से प्रभुत्व की ओर बढ़ना होगा और बढ़ना चाहिए। हमारा सामूहिक चुनौती केवल क्षमता निर्माण करना नहीं, बल्कि विश्वसनीयता स्थापित करना है- और इसे तत्परता और एकता के साथ करना है।

 

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