सतना: शहर, जो स्मार्ट सिटी मिशन का हिस्सा है, इसमें इन दिनों एक अजीबोगरीब समस्या ने लोगों का ध्यान खींचा है। भरहुत नगर में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए नेचुरल फव्वारे के पानी के दबाव ने सीवर लाइन चेंबर के ढक्कन को अपनी जगह से हिला दिया है। यह घटना न केवल तकनीकी खामियों की ओर इशारा करती है, बल्कि शहर के सीवर सिस्टम और स्मार्ट सिटी परियोजना के तालमेल की कमी को भी उजागर करती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, भले ही सतना में सीवर सिस्टम अभी पूरी तरह चालू नहीं हुआ है, लेकिन आए दिन सीवर चेंबरों में पानी का इतना दबाव बन रहा है कि वे तूफान की तरह उफान मार रहे हैं। हाल की घटना में, भरहुत नगर के एक सीवर चेंबर का ढक्कन पानी के दबाव के कारण अपनी स्थिति से हट गया, जिससे आसपास के इलाके में गंदगी और पानी फैल गया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बारिश का पानी और सीवर लाइन का गठजोड़ इस समस्या का मुख्य कारण हो सकता है।
जानकारों का मानना है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बनाए गए नेचुरल फव्वारे, जो शहर को सुंदर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, तकनीकी खामियों का शिकार हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सीवर लाइन और पानी की पाइपलाइन के बीच समन्वय की कमी के कारण बारिश का पानी चेंबरों में तेजी से प्रवेश कर रहा है। इसके अलावा, सीवर लाइनों की टेस्टिंग और मेनहोल चेंबरों के रखरखाव में लापरवाही भी इस समस्या को बढ़ा रही है। एक स्थानीय निवासी, राजेश पांडे ने बताया, सीवर चेंबरों से पानी का उफान इस कदर है कि सडक़ों पर गंदगी फैल रही है, और यह स्मार्ट सिटी का सपना धराशायी होता दिख रहा है।
पहले भी आई हैं समस्याएं
सतना में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सीवर लाइन और सडक़ निर्माण कार्यों में पहले भी कई खामियाँ सामने आ चुकी हैं। वर्ष 2021 में बारिश के कारण शहर के कई इलाकों में जलभराव और कीचड़ की समस्या देखी गई थी, जिसका कारण सीवर लाइन के अधूरे कार्य और टेस्टिंग की कमी को बताया गया था। हाल ही में, 2025 में कृष्ण नगर इलाके में सीवर लाइन की खुदाई के कारण जल संकट और व्यापार पर असर की शिकायतें भी सामने आई थीं।
स्थानीय लोगों की मांग
भरहुत नगर के निवासियों ने मांग की है कि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत चल रहे सभी कार्यों की गुणवत्ता की जाँच की जाए और समयबद्ध तरीके से इन्हें पूरा किया जाए। समाजसेवी महिपाल शुक्ला ने कहा, स्मार्ट सिटी के नाम पर जनता को सिर्फ़ परेशानी मिल रही है। अधिकारियों को चाहिए कि वे पहले बुनियादी ढाँचे को दुरुस्त करें।
