
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान दिया सुझाव; पहचान संबंधी त्रुटियों को सुधारने में मिल सकती है मदद।
नई दिल्ली, 11 जुलाई, 2025 (नवभारत): सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (EC) को बिहार की मतदाता सूची (वोटर लिस्ट) में पहचान संबंधी सत्यापन के लिए आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड को वैध दस्तावेजों के रूप में मानने पर विचार करने का निर्देश दिया है। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव से संबंधित चुनाव याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की है। कोर्ट का यह सुझाव मतदाता पहचान प्रक्रिया को अधिक सुगम और त्रुटिहीन बनाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि, “क्या आप (चुनाव आयोग) इस मामले में आधार को वोटर आईडी से जोड़ने की संभावना पर विचार कर सकते हैं, खासकर बिहार में?” यह टिप्पणी एक चुनाव याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें मतदाता सूची में अनियमितताओं और डुप्लिकेट प्रविष्टियों को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि मतदाता सूची में कई विसंगतियाँ हैं, जिसके कारण चुनावों की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है।
पहचान संबंधी त्रुटियों को सुधारने में सहायक, चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया का इंतजार
सुप्रीम कोर्ट का यह सुझाव ऐसे समय में आया है जब चुनाव आयोग पहले से ही मतदाता सूची को आधार से जोड़ने के पायलट प्रोजेक्ट चला रहा है ताकि डुप्लीकेट और फर्जी मतदाताओं को हटाया जा सके।
हालांकि, इस प्रक्रिया में गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को लेकर कुछ चिंताएँ भी उठाई गई हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश के बाद, अब देखना होगा कि चुनाव आयोग बिहार की मतदाता सूची के लिए आधार और वोटर आईडी को वैध दस्तावेजों के रूप में शामिल करने पर क्या कदम उठाता है। यदि ऐसा होता है, तो यह मतदाता पहचान प्रक्रिया को और मजबूत करने में मदद करेगा, जिससे भविष्य के चुनावों में पारदर्शिता बढ़ सकती है।
