
जबलपुर। पास्को,बलात्कार तथा अपहरण के अपराध में दोषी करार देते हुए सजा से दंडित किये जाने के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल ने पाया कि पीड़ित ने स्वीकार किया है कि अपीलकर्ता के द्वारा शादी करने से इंकार करने पर उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। पीडित के जन्मतिथि के संबंध में कोई दस्तावेज नहीं है। पीड़िता के माता-पिता के बयान के अनुसार वह बालिग है। युगलपीठ ने उक्त आदेश के साथ अपीलकर्ता की सभी सजा को निरस्त करने के आदेश जारी किये है।
अपीलकर्ता दीपक लोनी निवासी नौगांव जिला सतना की तरफ से पास्को सहित बलात्कार व अपहरण के अपराध में जिला न्यायालय द्वारा अधिकतम आजीवन कारावास की सजा से दंडित किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील में कहा गया था कि पीड़ित ने अपने बयान में कहा है कि वह किसी को बिना बताये स्वेच्छा से अपीलकर्ता के घर आई थी। अपीलकर्ता के घर में वह पांच दिनों तक रही थी। इसके बाद अपीलकर्ता ने उसे जाने के लिए कहा था। अपीलकर्ता ने शादी से इंकार कर दिया, जिसके कारण उसने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि स्कूल स्कॉलर रजिस्टर के अनुसार पीडित की जन्मतिथि मार्च 2006 है और घटना जुलाई 2021 की है। स्कूल में दाखिले के समय माता-पिता ने जन्म प्रमाण-पत्र के संबंध में कोई दस्तावेज पेश नहीं किये थे। माता-पिता के बयान के अनुसार वह निरक्षर है और उनके द्वारा पीड़िता का स्कूल में दाखिला 2011 में करवाया गया था। उस समय उसकी आयु 8 से 10 साल के बीच थी। पीड़िता के माता-पिता के बयान अनुसार पीड़ित के जन्म 2003 से पूर्व हुआ था। उनके बयान अनुसार घटना के समय पीड़ित बालिग थी।
पीड़िता स्वेच्छा के आरोपी के घर गयी थी और उसके साथ ष्षरीरिक संबंध स्थापित किए थे। पीड़िता बालिग होने के कारण ऐसी स्थिति में अपीलकर्ता को बलात्कार व अपहरण के अपराध में दोषी करार नहीं दिया जा सकता है। पीडिता बालिग थी इसलिए पास्को एक्ट के तहत भी उसे दोषी करार नहीं दिया जा सकता है। युगलपीठ ने उक्त आदेष के साथ सभी सजा को निरस्त करते हुए अपीलकर्ता को दोषमुक्त किए जाने के आदेश जारी किये है।
