
विदिशा।जिले में दम तोड़ रही स्वास्थ्य सेवाओं को दुरूस्त करने का इरादा लेकर आए डॉक्टर रामहित कुमार सीएमएचओ ने इलाज की व्यवस्थाओं को सुधारने का दावा किया है, सबसे पहले जिले में पनम रहे झोलाछाप डाक्टर और अवैध तरीके से संचालित हो रही मेडिकल स्टोर्स को अपने निशाने पर लिया है. हाल में लटेरी में एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई थी जिसके बाद हरकत में आया प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने झोलाछाप डाक्टरों की क्लीनिकों की जांच करना शुरू किया है इस दौरान करीब दो दर्जन के आसपास क्लीनिक भी सील की गई हैं. सीएमएचओ ने अपने आफिस में रखी प्रेस कांफ्रेस मे बताया कि उनका पहला लक्ष्य मातृ शिशु मृत्यु दर में कमी लाना है. अभी 1 हजार बच्चों के जन्म के दौरान 43 बच्चों की मौत पैदा होने के साथ ही हो जाती है. इसी तरह 1 हजार में से करीब 46 माताओं की मौत बच्चे को जन्म देने के तुरंत बाद हो जाती है इस रेसो का कम करना मकसद है. साथ ही यह भी प्रथामिकता रहेगी कि संस्थागत प्रसव ज्यादा हों. जहां 40 स्पेशलिस्ट डाक्टरों की पोस्टिंग होना चाहिए उसके मुकाबले हमारे पास 6 डाक्टर ही है. इसी तरह जिले के सरकारी अस्पतालों में भी डाक्टरों की भारी कमी होना बताया गया है. सीजेरियन सरकारी अस्पतला और मेडिकल कालेज में ही हो रहे हैं कोशिश की जा रही है कि बासौदा के अस्पताल में भी सीजेरियन किया जा सके. अस्पताल में दाईयों ने द्वारा डिलेवरी कराई जाती है इस पर सीएमएचओ ने कहा कि यह सही नहीं है टे्रंड नर्सिंग स्टाफ ही डिलेवरी करा सकता है.
दोनो के रजिस्टे्रशन अलग अलग होना जरूरी
झोला छाप डाक्टर और अवैध मेडिकल के संचालन पर सीएमएचओ ने बताया कि डाक्टर जिस पद्वति की डिग्री ली है उसी पद्वति से इलाज करना चाहिए, अन्य पद्वति से इलाज करना गलत है, वहीं मेडिकल और क्लीनिक आसपास है तो दोनों के दरवाजे और रजिस्टे्रशन भी अलग अलग होना चाहिए. उन्होने कहा कि जिले में अभियान चलाकर डाक्टरों के रजिस्टे्रशन और डिग्री की जांच की जा रही है, गलत मिलने पर क्लीनिक और मेडिकल स्टोर्स को सील किया जा रहा है और उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी. सभी ब्लाकों में मेडिकल आफिसर और तहसीलदार मिलकर जांच कर रहे हैं. सरकारी डाक्टरों द्वारा प्रायवेट क्लीनिक और नर्सिंग होम में प्रेक्टिस करने पर कहा कि इसके भी नियम बनाए गए हैं जिनका पालन करना जरूरीजो है. वहीं सार्थक एप पर उन्होने कहा कि जो नए डाक्टर आ रहे हैं उनमे से अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र में सेवाएं देने से कतरा रहे हैं.
