इंदौर:क्राइम ब्रांच इंदौर की सतर्कता और लगातार निगरानी के चलते ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में सट्टा चलाने वाली अंतरराज्यीय गिरोह का एक और बड़ा आरोपी गिरफ्त में आ गया है. इस हाईटेक सट्टा नेटवर्क के फरार टेक्निकल मॉनिटर विकास बंसल को पुलिस ने ग्वालियर से गिरफ्तार किया है. विकास सट्टे की वेबसाइट वरुण ऑनलाइन हब से जुड़ी ब्रांचों की तकनीकी मॉनिटरिंग करता था और क्लाइंट्स को तकनीकी सहायता भी देता था.इस मामले में अब तक दस आरोपी पकड़े जा चुके हैं, जिनमें मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार और राजस्थान के युवक शामिल हैं.
आरोपियों द्वारा इंदौर के संयोगितागंज क्षेत्र स्थित ऊषागंज के एक फ्लैट से ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा संचालित किया जा रहा था. ग्राहक को आईडी-पासवर्ड देकर वेबसाइट पर लॉगइन करवाया जाता था और गेम के हर मोड़ पर हार-जीत के दांव लगवाए जाते थे. क्राइम ब्रांच ने इस गिरोह के ठिकाने से अब तक की कार्रवाई में 29 मोबाइल, 2 लैपटॉप, 1 कंप्यूटर, 7 चेकबुक, 4 पासबुक, कई एटीएम कार्ड्स, 6.5 लाख रुपए नकद और एक अर्टिगा कार जब्त की है. साथ ही करोड़ों रुपए का सट्टे से जुड़ा ऑनलाइन रिकॉर्ड भी पुलिस के हाथ लगा है. मामले में एडीसीपी क्राईम राजेश दंडोतिया का कहना है कि सभी डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है.
गिरफ्तार आरोपियों में इंदौर का रहने वाला हिमांशू खंडेलवाल, उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में रहने वाला रविन्द्र गौतम, राजस्थान के भरतपुर में रहने वाला विवेक कुमार, बिहार के मधुबनी में रहने वाला अमित मंडल के साथ यहीं का रहने वाला कृष्णा कुमार और कन्हैया पांडे, इंदौर का निखिल खंडेलवार, लक्की उर्फ अभिजीत चौहान, राकेश जैन स्थायी निवासी ललितपुर, हाल निवासी इंदौर के साथ ग्वालियर के रहने वाले विकास बंसल को गिरफ्तार किया है.
विकास बंसल एमबीए पास है, और इस गिरोह का टेक्निकल ऑपरेटर था, जो ग्राहकों को वेबसाइट पर गेमिंग से जुड़ी समस्याओं का समाधान देता था और ऑनलाइन ब्रांचों की निगरानी करता था. पूछताछ में उसने सट्टे से जुड़ी मॉनिटरिंग गतिविधियों को कबूला है. दंडोतिया का कहना है कि इंदौर पुलिस कमिश्नरेट द्वारा ऑनलाइन सट्टे और जुए के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत क्राइम ब्रांच ने इस नेटवर्क की कमर तोड़ दी है. वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों पर लगातार दबिशें दी जा रही हैं और अवैध ऑनलाइन नेटवर्क्स की पड़ताल की जा रही है.
ऐसे चलता था ऑनलाइन सट्टे का खेल
पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि वेबसाइट वरुण ऑनलाइन हब पर 24×7 चलने वाले सैकड़ों गेम्स में ग्राहक अपनी सुविधा अनुसार दांव लगाते थे. प्रत्येक ग्राहक को अलग-अलग बैंक खातों में पेमेंट करने के बाद एक वर्चुअल आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराया जाता था, जिस पर प्वॉइंट्स क्रेडिट किए जाते थे. इसके बाद संबंधित वेबसाइट पर लॉग इन कर ग्राहक मनचाहा गेम चुनकर सट्टा लगाते थे. आईडी जनरेशन से लेकर प्वॉइंट ट्रांसफर तक पूरा सिस्टम हाईटेक, ग्राहक की मांग पर आरोपियों द्वारा वर्चुअल आईडी और पासवर्ड तैयार किए जाते थे, ग्राहकों से ली गई रकम अलग-अलग बैंक खातों में जमा कराई जाती थी.
जमा रकम के अनुसार आईडी में पॉइंट्स क्रेडिट किए जाते थे, जो दांव लगाने के काम आते थे. इसके बाद ही ग्राहक वरुण ऑनलाइन हब पर लॉग इन कर मनचाहा गेम चुनता और 24×7 दांव खेलता था. आरोपियों द्वारा लिंक भेजकर वेबसाइट तक पहुंच दिलाई जाती थी, जिससे सट्टा सीधा मोबाइल या लैपटॉप से संचालित होता था.पूरी प्रक्रिया मोबाइल, लैपटॉप और कंप्यूटर से रीयल टाइम मॉनिटर की जाती थी. टेक्निकल मॉनिटर विकास बंसल वेबसाइट की सभी ब्रांचों की निगरानी और क्लाइंट सपोर्ट का काम करता था
