भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों के हित में लिया बड़ा फैसला, अब बैंक नहीं लगा पाएंगे मिनिमम बैलेंस न रखने पर पेनल्टी; फाइनेंशियल इन्क्लूजन को मिलेगा बढ़ावा।
नई दिल्ली, 2 जुलाई : बैंक खाते में मिनिमम बैलेंस बनाए रखने की चिंता अब करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए अतीत की बात हो गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में एक नया नियम लागू किया है, जिसके तहत अब बैंकों को सेविंग अकाउंट में न्यूनतम शेष राशि (मिनिमम बैलेंस) न रखने पर ग्राहकों से जुर्माना वसूलने की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला देश में फाइनेंशियल इन्क्लूजन (वित्तीय समावेशन) को बढ़ावा देने और आम जनता को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
यह नया नियम विशेष रूप से उन ग्राहकों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहते हैं, या जिनकी आय अनियमित है। पहले, अधिकांश बैंकों में सेविंग अकाउंट में एक निश्चित न्यूनतम बैलेंस बनाए रखना अनिवार्य था (जैसे ₹1000, ₹3000 या ₹5000, बैंक और खाते के प्रकार के आधार पर)। यदि ग्राहक इस राशि को बनाए रखने में विफल रहते थे, तो बैंकों द्वारा भारी जुर्माना लगाया जाता था, जिससे कई बार उनका खाता नकारात्मक बैलेंस में भी चला जाता था। आरबीआई के इस नए निर्देश के बाद, बैंकों को अब ऐसे खातों पर कोई शुल्क नहीं लगाना होगा। यह कदम पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देगा, जिससे बैंक ग्राहकों को बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के बैंकिंग सेवाओं का उपयोग करने की स्वतंत्रता मिलेगी। यह सुनिश्चित करेगा कि हर कोई, चाहे उसकी आय कितनी भी हो, बिना किसी डर के बैंक खाता खोल और संचालित कर सके।
जनधन खातों की तर्ज पर राहत, बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच होगी आसान
यह नया नियम एक तरह से प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत खोले गए जीरो बैलेंस खातों की तर्ज पर ही काम करेगा, जिससे वित्तीय सेवाओं तक आम आदमी की पहुंच और आसान हो जाएगी।
आरबीआई का मानना है कि इस कदम से बैंकिंग प्रणाली में लोगों का विश्वास बढ़ेगा और अधिक से अधिक लोग औपचारिक वित्तीय सेवाओं का लाभ उठा पाएंगे। बैंकों को अब अपनी व्यावसायिक रणनीतियों में बदलाव करना होगा और वे अन्य मूल्यवर्धित सेवाओं के माध्यम से राजस्व अर्जित करने पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। यह नियम छोटे बचतकर्ताओं और दैनिक मजदूरों सहित समाज के कमजोर वर्गों को सशक्त करेगा, जिन्हें अक्सर न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने में कठिनाई का सामना करना पड़ता था। इससे भारत की वित्तीय प्रणाली में एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है।

