इंदौर: हाल ही में रतलाम में मुख्यमंत्री के वाहन में ईंधन के साथ पानी भी पहुंच गया जिससे भ्रष्टाचार की पोल खुल गई कि किस तरह वह सौ रूपए लीटर पानी बेच रहे है और आम जनता को ठग रहे है. हर दिन का आंकड़ा लगाया जाए तो लाखों लीटर ईंधन विभिन्न पेट्रोल पम्प से बेचा जाता है. कहीं मात्रा कम होने की शिकायत मिलती तो कहीं मिलावट होने की.
लेकिन इससे बचने के लिए पम्पकर्मी उपभोक्ताओं से लड़ भिड़ जाते है. कई बार शिकायत भी हुई लेकिन भ्रष्टाचार की रकम इतनी बड़ी होती है कि कोई कार्रवाई नहीं होती. सालों से आम नागरिकों की जेब पर डाका डाला जाते आ रहा है. अब देखना यह है कि बड़े स्तर पर प्रदेश के कितने पेट्रोल पम्पों और कितने अफसरों पर कार्रवाई होती है या फिर मंत्रियों द्वारा लीपा-पोती कर दी जाती है.
इनका कहना है
राज्य सरकार कहती है भ्रष्टाचार मिटाएगी. अब मौका है. सरकार ऐक्शन में आए. उचित कार्रवाई कर उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण ईंधन दिलवाकर न्याय करे. दोषियों को कठोर सजा हो और काला धन वसूली भी करें.
योगेश गवली
आम जनता कहती आ रही थी तब कोई असर नहीं हुआ. अब उन्हें पक्का विश्वास लगने लगा कि पेट्रोल पम्प पर लोगों के साथ ठगी होती आ रही है. अब तो सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
सलीम खान
पेट्रोल पम्प पर निर्मित ईधन टैंक और पम्प मशीन चेक करने वाले अधिकारी भ्रष्टाचार फैलाते हैं, जिसका ख़मयाज़ा लोगों को भुगतना पड़ता है. खुली चोरी और मिलावट को रोकना बहुत ज़रूरी है.
अचल सक्सेना
