
पन्ना। पन्ना में शुक्रवार शाम 7 बजे जगन्नाथ स्वामी की ऐतिहासिक रथयात्रा परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ भव्य रूप से निकाली गई। आयोजन की शुरुआत भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई। तीनों भगवानों को अलग-अलग रथों में विराजित कर राजपरिवार की ओर से महाराजा छत्रसाल द्वितीय ने आरती उतारी और चंवर डुलाया। यह रथयात्रा पुरी की तर्ज पर आयोजित होती है और देश की प्रमुख रथयात्राओं में से एक मानी जाती है।
पन्ना का जगन्नाथ मंदिर 1700 ई. में महाराजा किशोर सिंह द्वारा स्थापित किया गया था। मान्यता है कि भगवान ने उन्हें स्वप्न में पुरी से मूर्तियाँ पन्ना लाने का निर्देश दिया था, जिसके बाद 2 वर्ष की कठिन यात्रा के बाद वे प्रतिमाएँ पन्ना लाई गईं। तब से हर वर्ष आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को रथयात्रा निकाली जाती है।
इस अवसर पर विधायक बृजेंद्र प्रताप सिंह, प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस बल और हजारों श्रद्धालु मौजूद रहे। रथ यात्रा का समापन तीसरे दिन जनकपुर में होता है, जहाँ भव्य मेला और सजावट होती है। मंदिर में आज भी अंकुरित मूंग और मिश्री का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जो एक प्राचीन किवदंती से जुड़ा है।
