रायपुर 26 जून (वार्ता) छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध कवि एवं लेखक पद्मश्री डॉ.सुरेन्द्र दुबे का गुरुवार को यहां एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।
डॉ. दुबे के पारिवारिक सदस्यों ने सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि लंबे समय से बीमार चल रहे डॉ. दुबे का एसीआई,रायपुर में उपचार चल रहा था। हृदय की गति रूकने के कारण आज दोपहर उनका निधन हो गया।
आठ अगस्त 1953 को बेमेतरा में जन्मे पेशे से चिकित्सक रहे कवि ने पांच पुस्तकें लिखी हैं। वर्ष 2008 में उन्हें काका हाथरसी से हास्य रत्न पुरस्कार से सम्मनित किया गया था। भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2010 में पद्मश्री से सम्मानित किया था।
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने श्री दुबे के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है।
राज्यपाल ने अपने शोक संदेश में कहा, ‘’डॉ. दुबे ने अपनी व्यंग्यात्मक शैली, हास्यबोध और सामाजिक सरोकारों से भरी रचनाओं के माध्यम से हिन्दी कविता जगत को समृद्ध किया। वे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश में अपनी विशिष्ट शैली के लिए जाने जाते हैं। उनकी कविताओं ने समाज को स्वस्थ हास्य के साथ नई सोच की दिशा दी। राज्यपाल ने कहा कि डॉ. दुबे का निधन साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकसंतप्त परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।’’
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने एक्स पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि “छत्तीसगढ़ी साहित्य व हास्य काव्य के शिखर पुरुष, पद्मश्री डॉ. सुरेन्द्र दुबे जी का निधन साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। अचानक मिली उनके निधन की सूचना से स्तब्ध हूं। अपने विलक्षण हास्य, तीक्ष्ण व्यंग्य और अनूठी रचनात्मकता से उन्होंने न केवल देश-विदेश के मंचों को गौरवान्वित किया, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा को वैश्विक पहचान दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई।जीवनपर्यंत उन्होंने समाज को हँसी का उजास दिया, लेकिन आज उनका जाना हम सभी को गहरे शोक में डुबो गया है। उनकी जीवंतता, ऊर्जा और साहित्य के प्रति समर्पण सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें एवं शोकाकुल परिजनों और असंख्य प्रशंसकों को इस दुःख की घड़ी में संबल प्रदान करें।”
