NATO के ऐतिहासिक फैसले के बाद भारत के डिफेंस सेक्टर में बंपर उछाल: निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स ने लगाई जबरदस्त छलांग, निवेशकों में उत्साह

नाटो सदस्य देशों द्वारा रक्षा खर्च बढ़ाने के संकल्प ने भारतीय रक्षा कंपनियों के शेयरों को दिया बड़ा पुश; आत्मनिर्भर भारत और रक्षा निर्यात बढ़ने की उम्मीदें मजबूत।

नई दिल्ली, 26 जून (नवभारत): नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन में हुए एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद, भारतीय शेयर बाजार में रक्षा (Defence) सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। इस खबर के आते ही निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स (NIFTY INDIA DEFENCE) ने शानदार प्रदर्शन किया, जिससे निवेशकों में खासा उत्साह है। नाटो सदस्य देशों ने अपने रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2% तक बढ़ाने का संकल्प लिया है, जिसका सीधा सकारात्मक असर उन देशों के साथ व्यापार करने वाली भारतीय रक्षा कंपनियों पर पड़ने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नाटो देशों द्वारा रक्षा खर्च में वृद्धि का सीधा लाभ उन देशों को मिलेगा जो सैन्य उपकरण और तकनीक का निर्यात करते हैं। भारत, जो अपनी ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत रक्षा उत्पादन और निर्यात पर विशेष ध्यान दे रहा है, को इससे बड़ा फायदा मिल सकता है। कई भारतीय रक्षा कंपनियां अब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बन रही हैं और उन्हें नाटो देशों से नए ऑर्डर मिलने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। इस घोषणा के बाद, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL), मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) जैसी प्रमुख भारतीय रक्षा कंपनियों के शेयरों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

आत्मनिर्भरता और निर्यात को मिलेगा बढ़ावा, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

नाटो के इस फैसले ने भारतीय रक्षा क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी को और बढ़ा दिया है। सरकार की मेक इन इंडिया और डिफेंस कॉरिडोर पहलें पहले से ही इस सेक्टर को मजबूत कर रही हैं, और अब वैश्विक मांग में वृद्धि से इन प्रयासों को और गति मिलेगी। भारतीय कंपनियां न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा कर रही हैं, बल्कि अब वे पड़ोसी देशों और अफ्रीका तथा एशिया के अन्य क्षेत्रों को भी रक्षा उत्पाद निर्यात कर रही हैं।

यह उछाल इस बात का भी संकेत है कि भारतीय रक्षा क्षेत्र केवल घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि अब वह वैश्विक रक्षा व्यापार में भी अपनी जगह बना रहा है। निवेशकों को उम्मीद है कि आगामी तिमाहियों में भारतीय रक्षा कंपनियों के ऑर्डर बुक में और वृद्धि देखने को मिलेगी, जिससे उनके राजस्व और लाभ में सुधार होगा। यह नाटो का फैसला भारत के डिफेंस सेक्टर के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित हो सकता है।

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