देवेगौड़ा ने केंद्र से की कर्नाटक के आम किसानों की मदद करने की अपील

बेंगलुरु, (वार्ता) पूर्व प्रधानमंत्री एवं राज्यसभा सांसद एच डी देवेगौड़ा ने केंद्र सरकार के कर्नाटक के आम उत्पादक किसानों की सहायता करने की अपील की है।

श्री देवेगौड़ा ने इस संबंध में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है और उसने भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नैफेड) और वन प्रमाणन एवं संरक्षण नेटवर्क (एनसीसीएफ) जैसी एजेंसियों के माध्यम से आमों की तत्काल केंद्रीय खरीद शुरू करने की गुजारिश की है। उन्होंने कहा है कि कर्नाटक में आम उत्पादक संकट से जूझ रहे हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री ने 22 जून को लिखे पत्र में आम की कीमतों में भारी गिरावट, अनिश्चित मौसम के कारण फसल को हुए नुकसान और अंतर-राज्यीय व्यापार में व्यवधानों का उल्लेख किया है, जिससे हजारों छोटे और सीमांत किसान वित्तीय संकट में फंस गए हैं। उन्होंने किसानों की आय की रक्षा के लिए मूल्य कमी भुगतान (पीडीपी) और बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) शुरू करने की गुजारिश की है। उन्होंने लिखा, “कर्नाटक भारत के अग्रणी बागवानी उत्पादक राज्यों में से एक है।” उन्होंने कहा कि राज्य में आम की खेती 1.39 लाख हेक्टेयर में फैली हुई है, हालांकि, इस साल जलवायु संबंधी कारकों और रोग प्रकोप के कारण आम का उत्पादन में काफी कमी आयी है। यह आठ से 10 लाख टन की अपेक्षित उपज का 30 प्रतिशत से कम हो गया है।

श्री देवेगौड़ा ने कहा कि मई और जून के दौरान भारी बाजार आवक के कारण कीमतों में भारी गिरावट आई है। पिछले साल 12,000 रुपये प्रति क्विंटल से घटकर 3,000 रुपये तक रह गयी, जो 5,466 रुपये की औसत खेती की लागत से काफी कम है। उन्होंने कहा, “इससे छोटे किसानों की वित्तीय स्थिरता बुरी तरह प्रभावित हुई है, जो अब बुनियादी इनपुट लागत भी वसूलने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।” चित्तूर जिले में तोतापुरी आमों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के आंध्र प्रदेश के फैसले से स्थिति और गंभीर हो गयी है। उन्होंने कहा कि इस कदम से कर्नाटक के सीमावर्ती जिलों के किसानों को फसल के बाद भारी नुकसान हो सकता है।

पूर्व प्रधानमंत्री ने इस दिशा में केंद्र सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपील करते हुए कहा कि वह नैफेड और एनसीसीएफ को किसानों से सीधी खरीद शुरू करने का निर्देश दे, जिसमें किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से खरीद भी शामिल है। उन्होंने कहा, “इस हस्तक्षेप से कीमतों को स्थिर करने, संकटपूर्ण बिक्री को रोकने और हमारे किसानों की आजीविका की रक्षा करने में मदद मिलेगी।” उन्होंने उम्मीद जताई कि कृषि मंत्रालय शीघ्र इस दिशा में कदम उठायेगा और मौजूदा संकट को कम करने के लिए समय पर वित्तीय सहायता और उचित मूल्य निर्धारण तंत्र सक्रिय होगा।

 

 

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