
सीहोर.जिला मुख्यालय से श्यामपुर मार्ग की सड़क को एफडीआर तकनीक से निर्मित प्रदेश में पहली सड़क का तमगा मिला था, लेकिन अफसोस यह तकनीक फ्लॉप साबित हुई. 30 करोड़ की लागत से बनी इस सड़क के गड्डों में अब तारकोल के थेगड़े लगाए जा रहे हैं.
सीहोर को श्यामपुर से जोडने वाली सड़क का निर्माण 2023 में एफडीआर तकनीक से किया गया था. करीब 30 करोड़ रुपए की लागत से 24 किलोमीटर सड़क एफडीआर तकनीक से बनी थी. सड़क निर्माण के दौरान दावा किया गया था कि अन्य सड़कों की उम्र पांच साल रहती है, लेकिन यह सड़क दस साल तक टिकी रहेगी, लेकिन पहली ही बारिश में सड़क जगह-जगह से टूट गई, सडक निर्माण को अभी दो साल भी नहीं हुए और सड़क में सैकड़ों गडढे हो गए हैं. बारिश के पहले इस एफडीआर तकनीक वाली सड़क में पेंचवर्क किया जा रहा है लेकिन सड़क पर चिपकी गिटटी वाहनों के पहियों से उखड़ रही है.
उल्लेखनीय है कि सीहोर से श्यामपुर तक की महत्वपूर्ण सड़क है. यह सडक जयपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे से मिलती है. इस सड़क के माध्यम से ही शहरवासी कुरावर, नरसिंहगढ़, ब्यावरा, राजगढ़, गुना-ग्वालियर सहित राजस्थान जाने के लिए उपयोग करते हैं. महत्वपूर्ण सड़क होने के चलते इस सड़क का निर्माण किया गया है. वर्ष 2023 में यह सड़क बनकर तैयार हुई है. खास बात यह है कि इस सडक का निर्माण एफडीआर पद्धति से किया गया है. इस तकनीक से निर्मित हुई प्रदेश की यह पहली सड़क है. एमपीआरडीसी ने इस सड़क का निर्माण कराया था.
इस तरह बनती है एफडीआर तकनीक से सड़क
सड़क निर्माण के दौरान एफडीआर पद्धति के संबंध में बताया गया था कि यह फुल डेप्थ रिक्लेमेशन रिसाइकिलिंग पद्धति है. इसमें बहुत ही कम संसाधनों में टिकाऊ सड़क बनाई जा सकती है. इसमें कच्ची सड़क को उखाड़ उसमें से निकलने वाले मटेरियल को प्लांट पर ले जाया जाता है. यहां पर सड़क के वेस्ट मटेरियल में केमिकल व आवश्यक सामग्री के साथ मिलाकर नया मटेरियल तैयार कर वापस से सड़क पर डाला जाता है. इसके बाद हवा के प्रेशर से सड़क की धूल को साफ करने के बाद उस पर फैब्रिक कपड़े को बिछाया जाता है, ताकि वह मॉइश्चराइजर्स को आब्र्जव कर सके. इसके बाद उसके ऊपर डामर के लेप का छिड़काव किया जाता है और फिर मटेरियल को उस पर डालकर रोलर को घुमाया जाता है. इसके लिए विशेष मशीन की जरुरत होती है. एफडीआर पद्धति से सडक निर्माण में लागत भी 50 प्रतिशत रह जाती है, जबकि इस पद्धति से बनी सड़क की आयु भी अपेक्षाकृत अधिक रहती है.
मरम्मत करने दिया है निर्देश
हमारे द्वारा सड़क निर्माण करने वाली फॅर्म को लेटर जारी कर मरम्मत का निर्देश दिया गया है. उन्हें 10 दिन के भीतर पूरी सड़क पर पैचवर्क व मरम्मत करने को कहा गया है. यह सड़क प्रायोगिक तौर पर एफडीआर तकनीक से बनाई गई थी. प्रयोग फेल रहा अब आगे इस तकनीक से सड़कें नहीं बनाई जा रही हैं. पेंच वर्क किया जा रहा है.
सोनल सिन्हा,
जीएम, एमपीआरडीसी
