
जबलपुर। भ्रष्टाचार के आरोपी में अभियोजन की स्वीकृति सक्षम प्राधिकरण के द्वारा प्रदान नहीं किये जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि ट्रायल कोर्ट में गवाहों की परीक्षण प्रारंभ हो गया है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि याचिकाकर्ता सक्षम प्राधिकरण द्वारा अभियोजन की अनुमति नहीं दिये जाने का मामला ट्रायल कोर्ट के समक्ष उठाने के लिए स्वतंत्र है।
स्मार्ट सिटी जबलपुर में सहायक यंत्री के पद पर पदस्थ आदित्य सिंह की तरफ से भ्रष्टाचार के प्रकरण में अभियोजन की स्वीकृति आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के द्वारा दिये जाने को चुनौती दी गयी थी। याचिका में कहा गया था कि तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी नगर पंचायत जयसिंह नगर जिला शहडोल द्वारा जिला चयन समिति द्वारा पारित संकल्प के आधार पर साल 1995 में उन्हे उपयंत्री के पद नियुक्त किया गया था।
एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि जुलाई 2021 के पारित आदेश से याचिकाकर्ता को जबलपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड जिला जबलपुर में सहायक यंत्री (प्रभारी) के पद पर पदस्थ किया गया था। इसके पूर्व याचिकाकर्ता संयुक्त संचालक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग कार्यालय जबलपुर में उपयंत्री के पद पर पदस्थ था। उक्त अवधि में उसके विरुद्ध रिश्वत मांगने के विरुद्ध लोकायुक्त ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 के प्रावधानों के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध किया गया। याचिकाकर्ता के खिलाफ अभियोजन शुरू करने के लिए लोकायुक्त के द्वारा सक्षम प्राधिकारी यानी आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से अनुमति मांगी गई थी। याचिकाकर्ता के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मई 2023 को प्रदान की गयी थी।
याचिकाकर्ता ने स्वीकार किया है कि ट्रायल कोर्ट में गवाहों का परीक्षण प्रारंभ हो गया है। याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता प्रदान की जाती है कि वह समक्ष प्राधिकरण के द्वारा अभियोजन की अनुमति प्रदान नहीं करने का मुद्दा ट्रायल कोर्ट के समक्ष उठाने के लिए स्वतंत्र है। अभियोजन पक्ष पर यह साबित करने का दायित्व होगा कि प्राधिकारी द्वारा वैध मंजूरी दी गई है।
