
पत्नी और छह बच्चे भूखे मरने की स्थिति में
पेटलावद- ग्राम पंचायत धतुरिया के ग्राम पिपलीपाड़ा में निवास करने वाले गरीब परिवार सुरेश पिता अमृतलाल बंजारा परिवार का पालन पोषण के लिए घर से मजदूरी करने को कहकर निकला था 5 वर्ष बित जाने के बाद भी आज तक सूरज बंजारा का कहीं अता-पता नहीं लगा पूरा परिवार दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो गया है पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक इस परिवार को किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता नहीं मिली और ना ही सुरेश बंजारा का अता-पता चला वर्तमान में यह गरीब परिवार रोजी-रोटी के लिए दर- दर की ठोकरे खाने को मजबूर हो रहा है तथा सुरेश की पत्नी आरती बाई बंजारा ने बताया कि सुरेश मजदूरी करने के लिए आज से 5 वर्ष पूर्व घर से यह कह कर निकला था कि मजदूरी के लिए बाहर देश जा रहा हूं वापस आज तक नहीं लौटा मेरे 6 बच्चे हैं जिसमें चार लड़कियां और दो बालक हैं छोटे-छोटे बच्चों को छोड़कर मेरा पति मजदूरी के लिए गया आज तक पता नहीं चला मैं पंचायत से लेकर जिला प्रशासन तक दर- दर की ठोकर खा रही हूं मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन पोषण कर रही हूं मजदूरी भी प्रतिदिन नहीं मिल पाती है मेरे नाम पर ना तो भूमि है ना मकान है 5 वर्ष बित जाने के बाद भी आज तक मुझे प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की आर्थिक मदद नहीं मिली है मेरे परिवार में बच्चों को भूखे मरने की स्थिति आ गई है टूटे-फूटे मकान में रहकर अपना जीवन यापन करती हूं बच्चों को लिखाई पढ़ाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है बच्चों का भविष्य अंधकार मय होता जा रहा है सुरेश के पिता अमृत बंजारा का कहना है कि कई गांव भटकते भटकते कहीं भी सुरेश का पता नहीं चला सरकारी मदद के लिए में कई कार्यालय के चक्कर लगाए लेकिन आरती को किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला शासन द्वारा जो नियम बनाए गए हैं परिधि में आरती का नाम नहीं आता जिसकी वजह से आर्थिक मदद नहीं मिल पा रही है पंचायत आरती के पति को मृत भी नहीं मान सकती है पिपलीपाड़ा के रामदास बंजारा, शंकर बंजारा ने बताया कि ऐसे परिवारों को जिला प्रशासन द्वारा किसी भी योजना के तहत आर्थिक मदद मिलना चाहिए यह अत्यंत गरीब परिवार होने के कारण 5 वर्ष से इस परिवार को आर्थिक मदद नहीं मिलने के कारण रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है जिला कलेक्टर से तत्काल आर्थिक मदद की मांग ग्रामीणों ने किया
फोटो- झोपड़ी में रहता आरती बंजारा का परिवार
