
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने प्रभारी संचालक उच्च शिक्षा डॉ. संतोष जाटव की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने साइंस कॉलेज का प्राचार्य बनाने को चुनौती दी थी। जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने कहा कि नियम के अनुसार अतिरिक्त संचालक का पद और प्राचार्य पीजी कॉलेज का पद समान है। अतिरिक्त संचालक का पद प्राचार्य से वरिष्ठ नहीं है, बल्कि वह केवल संभाग के विभिन्न कॉलेजों के बीच समन्वय करता है। वहीं कोर्ट ने शासकीय जटाशंकर त्रिवेदी कॉलेज बालाघाट के प्राचार्य डॉ. पंजाब राव चंदेलकर को अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा जबलपुर संभाग के पद पर पदस्थापना देने को भी सही करार दिया। याचिका में दलील दी गई थी कि डॉ. पंजाब याचिकाकर्ता से वरिष्ठ हैं। प्राचार्य के पद पर रहने से उन्हें अपने से कनिष्ठ अधिकारी के अधीन कार्य करना होगा। याचिकाकर्ता की सेवानिवृत्ति को 5 माह शेष हैं।
शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता वेद प्रकाश तिवारी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों और प्राचार्यों की सेवाओं को नियंत्रित करने वाले वैधानिक नियमों के अनुसार, प्राचार्य पीजी कॉलेज और संभाग के अतिरिक्त निदेशक का पद एक ही रैंक का है। दोनों एक दूसरे के स्थान पर आ सकते हैं। अतिरिक्त निदेशक का पद प्राचार्य पीजी कॉलेज की तुलना में कोई पदोन्नति वाला या उच्च पद नहीं है। कोर्ट ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता को उसी शहर में पदस्थापना दी गई है, इसलिए इससे उनके जीवन में कोई बाधा नहीं आएगी।
